
Best Parenting Tips and Tricks: कृष्णपाल सिंह चौहान. मोबाइल नहीं देने पर मासूम के आत्महत्या करने का मामला सामने आने पर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। शहर में नौनिहाल छोटी बात से नाराज होकर अपनी जान सांसत में डालने लगे हैं। लगातार उनके विचार में हो रहे आत्मघाती बदलाव कई परिवारों के लिए चिंता का कारण बन गए हैं। अनुभवी लोग बच्चों के मन में पैदा हो रही नकारात्मक सोच के पीछे चैटिंग, बेटिंग, गैमिंग मुख्य वजह मान रहे हैं। लगातार कई घंटे बच्चे इन गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं। जब तक उनके जीवन में सब ठीक चलता है तो माता-पिता भी फोकस नहीं करते, लेकिन जब वे बुरी लत के दलदल में फंस जाते हैं तो वे अपने ही परिवार से बातें छिपाने लगते हैं। ऐसे में बच्चा अवसाद का शिकार होकर आत्मघाती कदम उठाने की ओर बढ़ने लग जाता है। इस संबंध में पत्रिका ने एक्सपर्ट से चर्चा कर सुझाव निकाले हैं, ताकि समय रहते माता-पिता अपने बच्चों का बेहतर भविष्य बना सकें। रिहेबिलिटेशन साइकोलॉजिस्ट (Rehabilitation Psychologist ) माया बोहरा से सीखें बेस्ट पेरेंटिंग टिप्स एंड ट्रिक्स और बने बच्चों के लिए बनें दुनिया के सबसे बेस्ट पेरेंट...
केस - 1
गांव में रहकर पला-बढ़ा बच्चा माता-पिता का सपना पूरा करने शहर आया। डॉक्टर बनने के लिए वह कोचिंग जाने लगा। कुछ दिन बाद उसे लगा कि वह डॉक्टर नहीं बन सकता। यह बात वह माता-पिता को बताने में हिचकिचा रहा था। बाद में बच्चे ने कोचिंग जाना बंद कर दिया। दो साल तक ये सिलसिला चलता रहा। इस बीच वह परीक्षा में असफल हुआ तो खुद को कमरे में बंद रखने लगा। आत्मघाती कदम उठाने की सोचने लगा। किसी की मदद से बच्चा हमारे संपर्क में आया। उससे चर्चा के बाद उसके माता-पिता को बताया तो वे बच्चे के इस कदम पर यकीन करने की बजाए काउंसलर टीम पर सवाल उठाने लगे। तब यह बात सामने आई कि माता-पिता अपनी इच्छा के तहत बच्चों का जीवन संवारना चाहते हैं, लेकिन उनसे पूछते तक नहीं हैं कि वे क्या चाहते हैं। किस तरह पढ़ना चाहते हैं। कई दिन चली काउंसलिंग के बाद बच्चा अवसाद से निकल पाया। माता-पिता ने उस पर दवाब बनाना बंद कर दिया। उसने सामान्य पढ़ाई के बाद अपने क्षेत्र में व्यापार खोला। वह खुशी से जीवन व्यतीत कर रहा है।
केस - 2
मोबाइल और गेम में अधिक समय बिताने वाले बच्चे अवसाद में डूब रहे हैं। ऐसे केस में बढ़ोतरी हुई है। कोरोनाकाल में बच्चों को मोबाइल पढ़ने के लिए दिया था, लेकिन वह बाद में मोबाइल एडिक्शन के शिकार हो गए। अब वे मोबाइल में गेम खेलते हैं तो कुछ बेटिंग करते हैं। कई बच्चों की काउंसलिंग में सामने आया कि वे अधिकांश समय पबजी, फ्री फायर जैसे गेम में व्यस्त रहते हैं। दिन में लगातार छह घंटे और अधिकतम 15 घंटे। गेम खेलते-खेलते बच्चे अमीर बनने की चाहत में क्रिप्टो, बीट कॉइन निवेश के चक्कर में आ रहे हैं। निवेश की गई राशि अचानक डूब जाने से वे अवसाद में आ रहे हैं। ऐसे में माता-पिता बच्चों से मोबाइल ले लेते हैं तो वे विवाद करने के साथ खुद को कमरे में बंद कर गुस्सा जाहिर करते हैं। देखने में आया है कि पैसा डूब जाने पर कई बार बच्चे घर की वस्तु चोरी-छिपे बेच रहे हैं। जब माता-पिता रोकते हैं तो बच्चे धमकी देकर कहते हैं कि अब और कहा तो हम घर छोड़ देंगे।
केस - 3
युवाओं की तर्ज पर बच्चे डेटिंग साइट में उलझकर हो रहे ब्लैकमेल
स्कूल में 10वीं, 11वीं, 12वीं के बच्चे इन दिनों डेटिंग साइट के एडिक्ट हो रहे हैं। पीड़ित बच्चों की काउंसलिंग में पता चला है कि वे गर्लफ्रैंड नहीं बनाऐंगे तो स्कूल में सब हंसेंगे। इस चक्कर में बच्चे ट्रैप हो रहे हैं। उनसे डेटिंग के नाम पर ठग वाट्सएप पर चेटिंग करने लगते हैं। बाद में अश्लील फोटो शेयर करने की धमकी देकर 20 से 40 हजार रुपए की मांग करते हैं। इतनी कम उम्र के बच्चे इतना पैसा जुटाने में सक्षम नहीं होते हैं। ऐसे में धमकियों से वे अवसाद में आकर आत्मघाती कदम के रास्ते निकल पड़ते हैं।
एक्सपर्ट व्यू : इन बातों का रखें ध्यान तो बच्चें रहेंगे सुरक्षित (Best Parenting Tips and Tricks)
(माया बोहरा, पुर्नवास मनोवैज्ञानिक)
- कम उम्र के बच्चे फ्रैंड से ब्रेकअप होने की बात परिजन से सांझा नहीं करते। माता-पिता बच्चों से दोस्ताना व्यवहार रखें। उनसे आसानी से बात कर समस्याओं को समझें।
- नीड एंड वांट ट्रिक का इस्तेमाल कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर बच्चा रोज घर में दाल चावल खाता है तो इसे उसकी आवश्यकता कहेंगे। यदि उसे पिज्जा खाना है तो इसे उसकी इच्छा कहेंगे। बच्चों को समझाएं कि वे अपनी इच्छा अनुरूप न चलें। उन्हें संबंधित विषय के अच्छे और बुरे की जानकारी दें। बच्चा नहीं माने तो उसे खुद के निर्णय पर कुछ समय के लिए छोड़ दें। यह एक तरह की एक्सरसाइज है। इस बीच माता-पिता नजर रखें। दोस्त की तरह यदि बच्चा इच्छा अनुरूप काम करने में नाखुश हो और यह बात अपने माता-पिता को बताता है तो वह अवसाद में जाने से बच सकता है।
- ऑडियो- वीडियो ट्रिक अपनाएं। ऑडियो मतलब बच्चों को सुने, वीडियो मतलब उनकी हरकत पर नजर रखें। व्यवहार में बदलाव के मामले में प्रोफेशनल काउंसलर की मदद लें। ऑनलाइन हेल्पलाइन के कई ऑप्शन भी मौजूद हैं।
- बच्चों में हो रहे हार्मोनल चेंजेंस को लेकर अलर्ट रहें। जो माता-पिता यह सोचते हैं कि हमारा बच्चा ऐसा कुछ नहीं कर सकता तो ऐसा सोचना ठीक नहीं। अब तक की स्टडी में 9 से 90 साल की उम्र में डिप्रेशन होने की बात सामने आई है।
Updated on:
16 Dec 2023 12:54 pm
Published on:
16 Dec 2023 10:25 am
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