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जनप्रतिनिधियों के यहां से बंट रहे हैं रेमडेसिविर इंजेक्शन

अस्पतालों में किस को लगेगा रेमडेसिविर यह डॉक्टर नहीं विधायक कर रहे हैं तय

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इंदौर. कोरोना से बचाने वाला रेमडेसिविर इंजेक्शन कैसे लगेगा यह डॉक्टर नहीं विधायक तय कर रहे हैं, कई जनप्रतिनिधि इस इंजेक्शन को बांट भी रहे हैं। एक आरोपी ने पुलिस पूछताछ में इसका खुलासा भी किया है, उसने बताया कि इंजेक्शन उसने एक विधायक के यहां से लाइन में लग कर लिया था और उसे तीस हजार रुपये में ब्लैक में बेच दिया। इसे इतना तो साफ है कि रेमडेसिविर जनप्रतिनिधियों की पास पहुंच भी रहे हैं और वहां से बांटे भी जा रहे हैं ।

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पत्रिका ने हाल में ही रेवड़ी बना रेमडेसिविर शीर्षक से खबर प्रकाशित कर शहर में सियासत और अफसरशाही के गठजोड़ से इंजेक्शन की कालाबाजारी होने का खुलासा किया था। अब गठजोड़ की तरह खुलने लगी है विजयनगर पुलिस ने इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, इनमें से एक निर्मल ने कबूला है कि जरूरतमंदों के दस्तावेज लेकर विधायक के आ जाता था और वहां से इंजेक्शन ले लेता था।

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सरकारी अस्पतालों के आंकड़े नदारद
सरकार ने रेमडेसिविर का पूरा दारोमदार अपने हाथ में ले रखा है। निजी अस्पतालों को दिए इंजेक्शनों की सूची तो सार्वजनिक की जा रही है, लेकिन सरकारी अस्पतालों को कितने इंजेक्शन जारी हो रहे हैं इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं हो रही है। सूत्रों का कहना है इन्हीं आंकड़ों में हेरफेर कर सियासी रसूखदारों में इसकी पूर्ति की जा रही है।

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निजी अस्पतालों पर भी बना रहे हैं दबाव
सूत्रों के मुताबिक रसूखदार निजी अस्पतालों में भी भर्ती नजदीकी लोगों को इंजेक्शन लगाने के लिए डॉक्टर और अस्पताल के संचालकों पर दबाव बना रहे हैं। बड़ा सवाल दवाओं की बिक्री के लिए ड्रग लाइसेंस जरूरी है इसके बिना बिक्री या वितरण नहीं हो सकता ऐसे में यदि पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी सही बोल रहे हैं तो विधायक ने गैरकानूनी कृत्य किया।

कंपनी की सप्लाई में भी घालमेल
सरकार की इजाजत से शहर के कुछ बड़े अस्पताल सीधे कंपनियों से पहले के एग्रीमेंट के आधार पर इंजेक्शन हासिल कर रहे हैं हालांकि इसका पूरा रिकॉर्ड कंपनी और अस्पताल को सरकार को देने की बाध्यता है। बताया जा रहा है कि इस लेनदेन में भी घालमेल कर इंजेक्शनों की बंदरबांट हो रही है। इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया जिस मरीज के लिए रेमडेसीविर इंजेक्शन जारी किया गया है वह उसे मिलना चाहिए अगर गड़बड़ी की शिकायत सही मिलती है, तो निजी अस्पताल संचालकों पर रासुका की कार्यवाही की जाएगी।