
expensiveness
इंदौर। वर्ष 2023 में यह स्लोगन फिट है कि महंगाई डायन खाए जात है, क्योंकि आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते दाम बजट में अनफिट हैं। एक साल में गृहस्थी 30 फीसदी तक महंगी हो गई है। किचन का बजट बढ़ने से घर के मुखिया पर बोझ बढ़ा है। गृहिणी भी राशन का बिल देखकर चिंतित है। आटा, दाल, शकर, तेल, दूध, घी सहित खाने-पीने की सभी जरूरी चीजों के दाम बढ़े हैं। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों का महीने का बजट गड़बड़ा गया है। महीने का खर्च 3 से 5 हजार रुपए बढ़ा है। रसोई पर ही रोजाना औसतन 300 रुपए का अतिरिक्त खर्च हो रहा है। प्रदेश के बजट से लोगों को उम्मीद थी, लेकिन बजट के दिन ही गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से झटका लगा।
ज्यादा खपत वाली दाल के दाम ज्यादा
तुवर दाल के सबसे अधिक 33 फीसदी दाम बढ़े हैं। यह रोजमर्रा में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली दाल है। सोया व मूंगफली तेल में 21 से 29 फीसदी दाम बढ़ने से खाने का स्वाद बिगाड़ेगा। शकर के दाम 27 फीसदी बढ़ना बड़ी बात है। आटा महंगा होने से भोजन महंगा होगा।
किचन का खर्च बढ़ा
रसोई की एक भी सामग्री के दाम नहीं घट रहे हैं। मध्यमवर्गीय परिवार की बचत होना ही बंद हो गई है। उल्टा 300 रुपए रोज का किचन पर खर्च बढ़ गया है। सभी जरूरी वस्तुएं 11 से 30 फीसदी तक महंगी हो गई हैं। महंगाई का पूरा बोझ घर के मुखिया पर आ गया है। बजट से उम्मीद थी, वह भी खत्म हो गई है। सरकार को महंगाई कम करने पर जोर देना चाहिए, नहीं तो पड़ोसी देशों की तरह लोग महंगाई से त्राही-त्राही करने लगेंगे।
- सुनीता अनिल पाटनी, आनंद नगर
निर्यात पर लगे रोक
रोज कमाने-खाने वाले तबके के हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। अब भी लाखों लोगों के पास रोजगार नहीं है। ऐसे में लोगों के पास खर्च करने को पैसा आएगा कहां से? चिंता की बात इसलिए भी है कि भारत में महंगाई बिना मांग के बढ़ रही है। तंग आकर व्यापारी वर्ग के सामने मूल्य बढ़ाने के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं रह जाता। जो आयातकर्ता हैं, उनके माल पर इतना सीमा शुल्क लगा दिया जाता है कि वे भी बाजार में वस्तुओं के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। यदि निर्यात पर रोक लगे तो यहां की खपत को रोका जा सकता है। यदि महंगाई पर रोक नहीं लगती है तो आम आदमी का जीना दुश्वार होगा।
रमेश खंडेलवाल, अध्यक्ष, इंदौर होलसोल किराना मर्चेंट एसोसिएशन
कीमतों से कम हुआ व्यापार
कोरोना महामारी के बाद घटी आय के बीच आसमान छूती महंगाई से आम आदमी पर चौतरफा मार पड़ी है। बीते एक साल में पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, दूध, चीनी, दाल से लेकर खाने के तेल की कीमत में भयंकर उछाल आया है। इससे कम आय, नौकरीपेशा और मध्यमवर्ग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आम आदमी महंगाई से जूझ रहा है तो व्यापार कम होने से व्यापारियों की चिंता बढ़ रही है। रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम में उछाल आने से व्यापार कमजोर होता जा रहा है। ऊंचे भाव पर खरीदी कम होती जा रही है।
- अमित छाबड़ा, व्यापारी
Published on:
03 Mar 2023 02:05 pm
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