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ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था, मैं बच भी जाता तो… पढ़ें राहत इन्दौरी की शायरी

पढ़ें राहत इन्दौरी की कुछ शायरियां...

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राहत इंदौरी

राहत इंदौरी

इंदौर। मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी का कोरोना वायरस संक्रमण से निधन हो गया है। उनका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया था। इसके बाद वे इलाज के लिए अरविंदो अस्पताल में भर्ती हुए थे। राहत इंदौरी ने खुद ट्वीट कर यह जानकारी दी थी। राहत साहब तो दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन पीछे अदब का वो विरासत छोड़ गए हैं जो हमेशा नई पीढ़ी के लिए किसी खजाने से कम नहीं होगी।

डॉ. राहत इंदौरी उर्दू तहज़ीब के ऐसे वटवृक्ष थे जिसकी छाया में कई नवांकुर शायर और कवि बैठे हैं जिन्होंने उस वृक्ष की छाया महसूस की है। लंबे अरसे से श्रोताओं के दिल पर राज करने वाले राहत साहब की शायरी में हिंदुस्तानी तहज़ीब का नारा बुलंद है। पढ़ें राहत इन्दौरी की कुछ शायरियां...

- आँखों में पानी रखो होठों पे चिंगारी रखो जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो।

- ज़ुबाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लूटा हूँ मुझे हिसाब तो दे।

- लोग हर मोड़ पे रूक रूक के संभलते क्यूँ है इतना डरते है तो घर से निकलते क्यूँ है।

- शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं है हम आँधी से कोई कह दे के औकात में रहे।

- एक ही नदी के है यह दो किनारे दोस्तो दोस्ताना ज़िन्दगी से, मौत से यारी रखो।

- फूक़ डालूंगा मैं किसी रोज़ दिल की दुनिया ये तेरा ख़त तो नहीं है की जला भी न सकूं।

- प्यास तो अपनी सात समन्दर जैसी थी, ना हक हमने बारिश का अहसान लिया।

- मैंने दिल दे कर उसे की थी वफ़ा की इब्तिदा उसने धोखा दे के ये किस्सा मुकम्मल कर दिया शहर में चर्चा है आख़िर ऐसी लड़की कौन है जिसने अच्छे खासे एक शायर को पागल कर दिया।

- मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को समझ रही थी की ऐसे ही छोड़ दूंगा उसे।

- कही अकेले में मिलकर झंझोड़ दूँगा उसे जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूँगा उसे मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उस का इरादा मैंने किया था की छोड़ दूँगा उसे।

- जा के ये कह दो कोई शोलो से, चिंगारी से फूल इस बार खिले है बड़ी तय्यारी से बादशाहों से भी फेंके हुए सिक्के ना लिए हमने ख़ैरात भी माँगी है तो ख़ुद्दारी से।

- नये किरदार आते जा रहे है मगर नाटक पुराना चल रहा है।

- उस की याद आई है, साँसों ज़रा आहिस्ता चलो धड़कनो से भी इबादत में ख़लल पड़ता है।

- मैं वो दरिया हूँ की हर बूंद भँवर है जिसकी, तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।

- दो ग़ज सही ये मेरी मिल्कियत तो है ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया।