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Raksha Bandhan : 25 साल की उम्र से बांदा ‘नवाब’ को राखी बांधती थीं ‘रानी लक्ष्मीबाई’, अब वशंज निभा रहे हैं परंपरा

देश की आजादी के जश्न में रिश्तों की अनूठी दास्तानों का भी ताना-बाना है। जंग के मैदान से लेकर घर के आंगन तक इन रिश्तों की यादों की महक आज भी कायम है। ऐसा ही अनूठा रिश्ता था झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और बांदा नवाब का। 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में रानी लक्ष्मीबाई का साथ उनके मुंहबोले भाई अली बहादुर द्वितीय ने दिया था।

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Raksha Bandhan

अली बहादुर 1850 से 1858 तक बांदा के नवाब रहे। करीब 25 साल की उम्र से रानी लक्ष्मीबाई अली बहादुर को राखी बांधती थीं। रक्षाबंधन की परंपरा अली बहादुर के परिवार में आज भी कायम है। 1858 में अंग्रेज अली बहादुर को पकड़कर महू लाए और 90 साल तक बांदा नहीं लौटने की सजा मिली। इसके बाद वे इंदौर में ही बस गए।

परिवार की बेटियां भाइयों को बांधती हैं राखी

अली बहादुर के वंशज रेसीडेंसी स्थित बांदा कोठी में रहते हैं। अली बहादुर द्वितीय की चौथी पीढ़ी की सदस्य शाहीन बहादुर बताती हैं कि भाई-बहन के इस खूबसूरत रिश्ते पर रानी लक्ष्मीबाई और अली बहादुर ने जो मुहर लगाई थी, उसे आज भी निभा रहे हैं।

नवाब अवैस बहादुर व शाहीन बहादुर के बेटे नवाब उस्मान व नवाब उमर और नवाब अली बहादुर चतुर्थ के बेटे नवाब जुल्फकार व नवाब अब्बाज को उनकी बहनें महक और सुखरा रक्षा सूत्र बांधती हैं। शाहीन बहादुर की बड़ी बेटी अफीफा जब भी भारत आती हैं, भाइयों के साथ स्कूली बच्चों को भी राखी बांधती हैं।

शाहीन बहादुर हिंदी स्वराज महासंघ की अध्यक्ष भी हैं। उनके गुरु भाई राव साहब जब भी इंदौर आते हैं, रक्षाबंधन मनाते हैं। वहीं, नवाब अवैस बहादुर को अनुराधा सहस्त्रबुद्धे राखी बांधती हैं। घर की बेटियों के अलावा कई स्कूली छात्राएं भी राखी बांधती हैं।