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पानीपूरी बेचने वालों के लिए अब कैप पहनना जरूरी

पानीपूरी बेचने वालों के लिए अब कैप पहनना जरूरी

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पानीपूरी बेचने वालों के लिए अब कैप पहनना जरूरी


पानीपूरी विक्रेता के लिए कैप पहनना सबसे अहम् है। इसके साथ हाथों का धुला होना, पानी निकालने के लिए टोंटी वाला बर्तन, ढंका हुआ मसाला (आलू-चना) अनिवार्यता है। इसमें खटास के लिए किसी तरह के केमिकल या फूड कलर का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। यदि कोई सेलर नियमों का पालन नहीं करता है तो कस्टमर को चाहिए कि वह इसका बहिष्कार करें क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।


इंदौर। पानीपूरी बेचने वालों के लिए नए नियम कायदे बन गए हैं। इसके तहत हैंडवॉश सबसे ज्यादा जरूरी है। साथ ही टोंटी वाले बर्तन से पानीपूरी में जलजीरे वाला पानी भरना, कैप पहने रहना अनिवार्य होगा। यदि पानीपूरी बेचने वाला इनका ध्यान नहीं रखेगा तो उस पर चालानी कार्रवाई होगी।
हाल ही में फूड डिपार्टमेन्ट ने देशभर में पानीपूरी बेचने वालों के लिए नई गाइड लाइन तय की है। इसके अनुसार आठ से अधिक नियमों का पालन करने वाला ही पानीपूरी की बिक्री कर सकता है। हालांकि शहर में पानीपूरी के सेलर कम हैं, इसलिए यहां इसका असर कम ही पड़ेगा। जबकि उज्जैन-भोपाल में पानीपूरी के विक्रेता अधिक है इसलिए वहां ज्यादा सख्ती होगी। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी के अनुसार पानीपूरी बेचने वालों के लिए बनाए निर्देशों के पालन के लिए बीते दिवस भोपाल तथा उज्जैन में ट्रेनिंग कैम्प लगाया गया जिसमें अधिकारियों को बताया गया कि वह किस आधार पर चेकिंग कार्रवाई करें? नए नियमों में पानीपूरी विक्रेता बगैर कैप पहने इसे नहीं बेच सकता। क्योंकि ऐसी स्थिति में सिर के बाल पानीपूरी में गिर सकते हैं। इसके साथ इसके हाथों का साफ होना जरूरी है। उसे हर आर्डर के बाद हाथ धोकर साफ कपड़े से पोंछना होगा। इसी तरह बताशे में पानी भरने के लिए टोंटी वाला बर्तन तथा ढंके हुए मसाले का इस्तेमाल, खटास के लिए किसी भी तरह के केमिकल का उपयोग पर रोक है। स्वामी ने बताया कि यदि कोई कस्टमर लापरवाही पूर्वक पानीपूरी बेचता है तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी।

सिटी पोस्ट ऑफिस: तौल मापक जब्त

सरकारी ऑफिस के तौल में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। बीते दिनों नापतौल विभाग ने सिटी पोस्ट ऑफिस में इस्तेमाल हो रही तौल मापक मशीन की जांच की जिसमें वेट में अन्तर आने पर केस दर्ज कर मशीन तो जब्त किया गया। निरीक्षक संजय पाटणकर ने बताया कि वित्तीय साल के लिए नए टारगेट आ गए हैं हालांकि इन पर मई महीने से कार्रवाई शुरू होगी। इनमें सीएनजी जांच, हाट बाजारों में इस्तेमाल होने वाले तौल मापक (तराजू-बांट), आयातित स्प्रै की पैकिंग में दर्ज वजन की चेकिंग मुख्य होगी। इसके लिए आज से भोपाल में ट्रेनिंग शुरू होगी जिसमें शहर से पांच अधिकारी भाग ले रहे हैं।