बहरहाल, आज हम हिन्दी दिवस मना रहे हैं, लेकिन हिन्दी की दशा और स्वयं के हिन्दी ज्ञान वृद्धि के बारे में हम कितना सोचते हैं। वर्तमान में अंग्रेजी भाषा पर इतना जोर दिया जाता है कि आज के बच्चे हिन्दी के बारे में सीख ही नहीं पाते। आप खुद इस बात को परख सकते हैं उनसे हिन्दी गिनती पूछकर। उनसे हिन्दी वर्णमाला के कुल अक्षर पूछिए तो बगले झांकने लगेंगे। अलबत्ता अंग्रेजी के पूछिए तो एक ही सांस में ए से जेड तक सुना देंगे। अब अगर जो कुल अक्षरों की संख्या ही नहीं बता सकता तो उससे वर्णमाला को सही क्रम में लिखने की आशा कैसे की जा सकती है? फिर रस, छंद, अलंकार, समास की बात तो भूल ही जाना चाहिए!
हिन्दी भाषा का महत्वजो लोग हिन्दी की अपेक्षा अंग्रेजी भाषा का अधिक समर्थन करते हैं, उन्हें ये पता होना चाहिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी हिन्दी की प्रशंसा करते हुए अमेरिकियों से हिन्दी सीखने के लिए कह चुके हैं।
भारतीय संविधान के 17 भाग के अध्याय की धारा 343 (1) में हिन्दी को राज भाषा का दर्जा दिया गया है। इसकी लिपि देवनागरी होगी और राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंको का रूप अंतर्राष्ट्रीय होगा।
हिन्दी दरअसल एकमात्र ऐसी वैज्ञानिक भाषा है, जो जैसी बोली जाती है वैसी ही लिखी भी जाती है। यह पूरी तरह से समृद्ध भाषा है। इसमें चाचा, ताऊ, मामा, मौसा, फूफा जैसे संबोधनों से रिश्ते के बारे में जानकारी मिल जाती है, जबकि अंग्रेजी में इन सबके लिए 'अंकल' शब्द ही बोला जाता है।
मैं उद्देश्य किसी भाषा विशेष को नीचा दिखाना कतई नहीं है। मेरे कहने का अभिप्राय केवल इतना है कि हम अपनी हिन्दी भाषा की ओर उचित ध्यान दें, अपने बच्चों को सही हिन्दी सिखाएं, जिससे आने वाली पीढिय़ां भाषाई तौर पर सशक्त रहें। अन्य भाषा सीखने में गुरेज नहीं, लेकिन अपनी मातृभाषा पर तो पकड़ होनी ही चाहिए।
हिन्दी दिवस के बारे मेंभारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी। इस निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर सन 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष 'हिन्दी दिवसÓ के रूप में मनाया जाता है।
हिन्दी क्यों पीछे रह गईदरअसल हम अंग्रेजों की शिक्षा प्रणाली को अब तक अपनाए हुए हैं। जाहिर सी बात है इसमें अंग्रेजी का प्रभाव को परिलक्षित होगा ही। उस ज़माने में अंग्रेजी सीख लेना या अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। अंग्रेजी का ज्ञान रखने वालों को नौकरी आसानी से मिल जाती थी, लिहाजा लोगों का रुझान अंग्रेजी की ओर हुआ। तब से ये बदस्तूर जारी है। हमें ये समझना होगा कि अंग्रेजों द्वारा हम पर लादी गई शिक्षा प्रणाली अंग्रेजों के स्वार्थ पूर्ति के लिए थी। उन्हें कामकाज के लिए इंग्लैंड से व्यक्ति ना बुलाने पड़ें, बल्कि भारत में ही मिल जाएं, इसलिए लॉर्ड मैकाले ने यह शिक्षा पद्धति बनाई। हालांकि कालांतर में हमने इसमें अपने मुताबिक सुधार किए हैं, लेकिन मूल स्वरूप वही है। यही कारण है कि आज भी हिन्दी भाषा को हेय दृृष्टि से देखा जाता है।
सर्वाधिक उपयुक्त भाषाहिन्दी सदनीरा सलिला की तरह सतत प्रवाहित होने वाली भाषा है। इसमें लगातार कुछ शब्द हटते जाते हैं और समय के साथ-साथ हिन्दी नए शब्दों को समेट भी लेती है। अपने भावों की अभिव्यक्ति के लिए हिन्दी निश्चित रूप से एक सशक्त भाषा है।
आज हिन्दी दिवस को मनाने के लिए हम यह संकल्प लें कि अपना और अपने बच्चों का हिन्दी ज्ञान सतत बढ़ाते रहेंगे। इसी से हिन्दी को वह सम्मान हासिल होगा, जो एक राष्ट्रभाषा को होना चाहिए। साथ ही अगर आपको हिंदी भाषा के अक्षरों का ज्ञान नहीं है, तो इस पता करने का आज ही प्रयत्न करें। इसीलिए मैंने सही संख्या नहीं बताई है।