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सावन विशेष : एक पैर पर खड़े रहकर बनाते थे शिवलिंग, यहां 12 ज्योतिर्लिंग के एकसाथ होते हैं दर्शन

अद्र्धनारीश्वर तो कभी गणपति रूप में दर्शन देते हैं गेंदेश्वर महादेव

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इंदौर

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Hussain Ali

Jul 22, 2019

indore

सावन विशेष : एक पैर पर खड़े रहकर बनाते थे शिवलिंग, यहां 12 ज्योतिर्लिंग के एकसाथ होते हैं दर्शन

इंदौर. परदेशीपुरा स्थित श्री गेंदेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में पूरे वर्ष जहां विशेष अनुष्ठान होते है वहीं अन्य शहरों के शृंगार के कलाकारों से विशेष शृंगार भी किए जाते है। कभी अद्र्ध नारेश्वर तो कभी सूर्य भगवान तो कभी पुत्र गणेश के रूप में भक्तों को दर्शन देते है। सालभर बुधवार और रविवार को शृंगार तय किया है। जबकि महा शिवरात्रि और अन्य पर्व -उत्सव पर विशेष शृंगार किया जाता है। शिवधाम के नाम से प्रचलित मंदिर में देश के 12 ज्योतिर्लिंग बनाए गए है।

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मंदिर प्रबंधक राजेश विजयवर्गीय बताते है कि उनके दादाजी गेंदालाल विजयवर्गीय भोलेनाथ के भक्त थे। रोजाना एक पैर पर खड़े होकर पार्थिव शिवलिंग हाथ पर बनाते और अभिषेक करते थे। उनकी इच्छा के अनुसार मंदिर का निर्माण किया है। नर्मदा किनारे से शिवलिंग लाया गया है। पूरे साल भर जहां हर पर्व मनाया जाता है वहीं विशेष शृंगार भी किया जाता है। कई स्वरूपों में भोलेनाथ भक्तों को दर्शन देते है।

संस्कृति के साथ तिलक भी पहचान

भोले बाबा के श्रृंगार का ध्यान इस तरह किया जाता है कि आने वाले भक्तों को अपनी पारंपरिक संस्कृति के साथ वेद और अन्य परंपराओं का भी ज्ञान हो। कई तरह के तिलक का भी शृंगार किया जाता है। बुधवार को पुत्र गणेश और रविवार को सूर्य भगवान का श्रृंगार ही होता है। शृंगार में ६ घंटे लगते हंै। जलाशय बनाकर नौका विहार, फूल बंगला, अमरनाथ बाबा, कैलाश पर्वत, केदारनाथ की गुफाएं सहित कई थीम पर शृंगार हो चुका है।

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भक्तों की श्रद्धा पर शृंगार

भक्त जो सामग्री देते हैं उसके आधार पर शृृंगार किया जाता है। भांग, ड्रायफ्रूट, वस्त्र, नवरत्न, जरी-गोटा सहित कई सामग्री का उपयोग होता है। महाशिवरात्रि, जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गुरु पूर्णिमा, सावन सोमवार सहित कई बड़े दिनों पर विशेष अनुष्ठान, शृंगार भी होते हैं।

पार्थिव शिवलिंग बनाने का महत्व

पार्थिव शिवलिंग का बनाने का सबसे अधिक महत्व है। पूरे 365 दिन पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर अभिषेक किया जाता है। सावन में प्रतिदिन 11 हजार और सोमवार को 31 हजार पार्थिव शिवलिंग बनाए जाते है। इनका अभिषेक कर बाद में नर्मदा में विसर्जन होता है।