
इंदौर। शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है लेकिन हर बच्चे को खासकर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे गरीबी और मजबूरी के कारण वंचित रह जाते है। लेकिन शहर के युवा विक्रम सिंह सोलंकी ने ऐसे बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाकर उन्हें शिक्षित बनाने का बीड़ा उठाया है। विक्रम ने अलीराजपुर के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली दो बहनें 8 वर्षीय नीता और 7 वर्षीय अनीता को मजदूरी से छुड़ाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। बहुत प्रयासो और बच्चियों के पिता को समझाने, मनाने के बाद दोनों बहनों का स्कूल में प्रवेश हुआ है। जिसकी बदौलत आज दोनों बहनों के हाथों में गिट्टी, सीमेंट की जगह किताब और कलम है।
विक्रम ने बताया कि अलीराजपुर के मोरासा गांव में रहने वाली दो बहनें 8 वर्षीय नीता और 7 वर्षीय अनीता भी पलायन का शिकार हुई थीं। इन दोनों के पिता रोजगार के लिए अलीराजपुर से गुजरात चले गए। वें अपनी पत्नी और दोनों बेटियों को साथ लेकर पलायन कर गए। जिस उम्र में दोनों बहनों के हाथों में कॉपी-किताब होनी चाहिए थी, उस उम्र में उनके हाथ बाल मजदूरी से भर चुके थे। उनके पिता गुजरात में मिस्त्री का काम करते थे, जहां नीता और अनीता ईंट और सीमेंट उठाने का काम करती थीं।
उन्होंने कम उम्र में ही अपने पिता के साथ मजदूरी शुरू कर दी थी। इसलिए नीता और अनीता भी कभी स्कूल न जा सकीं। साल 2019 में इन बच्चियों की मुलाकात विक्रम सिंह और तुषार कुलकर्णी से हुई। उस समय यह दोनों भी अपनी टीम के साथ डोर टू डोर संपर्क कर रहे थे। उस समय बच्चियों के पिता से मुलाकात की और दोनों बालिकाओं के स्कूल में प्रवेश के लिए तैयार किया गया।
नीता और अनीता के लिए पहले ऐसी जगह थी, जहां उन्होंने अपने जीवन में पहली बार कॉपी और किताबों को छुआ था। वरना इससे पहले तो उन्होंने केवल ईंटें ही उठाई थीं। अब उनके पिता भी समझ चुके है कि अगर उनकी बालिकाएं पढ़ती हैं तो उससे उनका भविष्य बेहतर होगा। इसलिए उन्होंने निश्चय किया कि वे दोनों बालिकाओं को नौकरी लगने तक पढ़ाएंगे।
Published on:
27 Jan 2023 08:04 am
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