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आखिर किसने की कविता रैना की हत्या?

- आरोप साबित नहीं होने पर महेश बैरागी दोष मुक्त, कोर्ट ने कहा, पुलिस अनुसंधान की कडिय़ां आपस में नहीं जुड़ रहीं

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इंदौर

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Amit Mandloi

May 19, 2018

kavita

आखिर किसने की कविता रैना की हत्या?


- फैसला आती ही कविता की सास बोलीं- कैसे माफ किया जा सकता है इसे

- कविता के पति संजय बिलखकर बोले, टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे मेरी पत्नी के३२ माह बाद आया फैसला

४२ गवाहों के दर्ज हुए बयान
७५ पेज का फैसला सुनाया कोर्ट ने

०२ धाराओं में दर्ज किया था केस

इंदौर. २६ अगस्त २०१५ को हुए शहर के सबसे चर्चित और विरतलम कविता रैना हत्याकांड पर शुक्रवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपी महेश बैरागी को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट का कहना है, पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश हत्याकांड से जुड़ी कडिय़ां आपस में नहीं जुड़ रहीं। अत: महेश को आरोप से बरी किया जाता है। फैसले के बाद अब बड़ा सवाल यह है कि यदि कविता की हत्या महेश ने नहीं तो फिर किसने की?
शुक्रवार करीब ३.४५ बजे विशेष अपर सत्र न्यायाधीश बीके द्विवेदी ने जैसे ही महेश को बरी करने के आदेश दिए, कविता की सास भरे कोर्ट में खड़ी होकर कहने लगीं, आप कैसे इस हत्यारे को बरी कर सकते हैं? तत्काल सुरक्षाकर्मी उन्हें कोर्ट रूम से बाहर ले गए। इसके बाद कविता के पति संजय रैना सहित अन्य परिजन दहाड़े मारकर रोने लगे। संजय ने कहा, मेरी पत्नी के टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे इसने, इसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। कुछ देर के लिए कोर्ट परिसर में रोने चीखने की आवाजें गूंजने लगीं।

फैसला सुनते ही फूट-फूट कर रोने लगा बैरागी

दोपहर तीन बजे इस प्रकरण पर फैसला आना था। इससे पहले ही कोर्ट के बाहर मीडिया सहित कविता रैना और महेश बैरागी के परिजन जमा हो गए। करीब ३.१५ बजे न्यायाधीश ने स्थान ग्रहण किया और आरोपी बैरागी को जाप्ते से लाने के आदेश दिए। करीब ३.२५ बजे कड़ी सुरक्षा में आरोपी महेश को कटघरे में खड़ा किया गया। महेश खड़े-खड़े कांप रहा था। कटघरे की कुछ दूरी पर उसकी पत्नी मीना बैरागी भी सहमी खड़ी थी। करीब ३.४४ बजे जज ने आदेश की प्रति के अंतिम पेज पर हस्ताक्षर किए और फैसला सुनाते हुए कहा, हत्याकांड से जुड़ी पुलिस की कहानी की कडिय़ां आपस में नहीं जुड़ रहीं, इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है। यह सुनते ही महेश और उसकी पत्नी कोर्ट में ही फूट-फूट कर रोने लगे। दोनों जज की ओर हाथ जोडक़र खड़े हो गए।

सीबीआइ करे मामले की फिर से जांच
आरोपी महेश की नि:शुल्क पैरवी करने वाले सीनियर एडवोकेट चंपालाल यादव ने फैसले के बाद कहा, अब कविता रैना के परिवार को न्याय मिलना बाकी है। पुलिस ने कुछ लोगों को बचाने के लिए निर्दोष को फंसाया था। हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक सही हत्यारों को सजा न मिल जाए। यह पहला केस था, जिसमें आरोपी की ओर से केस पर जल्द फैसला सुनाने के लिए हाइ कोर्ट में गुहार लगाई थी। यह केस एक बार फिर खोला जाना चाहिए और सीबीआइ से जांच कराना चाहिए। हमें शक है कि कुछ पुलिसवाले भी असली आरोपी को बचाना चाहते हैं।

कहानी के दो बिंदु ही प्रमाणित

एडवोकेट ओमप्रकाश सोलंकी ने बताया, कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि यह पूरा केस परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है। अभियोजन पक्ष महेश द्वारा २६ अगस्त को साईं कृपा इलेक्ट्रिकल्स से सीसीटीवी फुटेज मांगने तथा मित्रबंधु नगर में ली गई दुकान एक माह के भीतर ही खाली करने से जुड़े बिंदु को ही साबित कर सका है। बाकी कहानी साबित नहीं हुई।

ये बिंदु नहीं हो सके साबित
- कविता रैना को महेश के साथ मूसाखेड़ी स्थित आइडीए बिल्डिंग तक जाते किसी ने नहीं देखा, कोई सबूत पेश नहीं।

- बच्ची को लेकर स्टैंड जाने से पहले कविता के महेश की पत्नी मीना बैरागी की दुकान जाने का भी कोई सबूत पेश नहीं किया।
- सिलाई के लिए दिए कविता के कुर्ते की जब्ती महेश बैरागी के पास से साबित नहीं हुई।

- जिस चाकू और लोहे के पाइप से हत्या होना बताया, उसकी जब्ती भी महेश के पास से होना साबित नहीं। जब्त हथियार का प्रयोग हत्या में हुआ यह भी साबित नहीं।
- जिस फ्लैट में हत्या की बात कही गई और पार्र्किंग स्थल से एक्टिवा की बरामदगी के साक्ष्य भी कोर्ट में प्रमाणित नहीं हुए।

- सीसीटीवी फुटेज के साक्ष्य प्रमाणित नहीं हुए।

हाइ कोर्ट में करेंगे अपील
अभियोजन पक्ष के वकील एनके मंडलोई और राकेश पालीवाल ने कहा, महेश को दोषी सिद्ध करने के लिए पर्याप्त गवाह और सबूत पेश किए गए थे। ४१ में से सिर्फ आरोपी महेश की पत्नी पक्षद्रोही हुई, बाकी सभी ने पुलिस की कहानी का समर्थन किया। इस फैसले को शासन हाइ कोर्ट में चुनौती देगा।

ये है घटनाक्रम

२४ अगस्त २०१५ को मित्रबंधु नगर निवासी कविता रैना दोपहर में अपने बेटी को लेकर लेने एक्टिवा से स्कूल बस स्टॉप गई और गायब हो गई। पति संजय रैना ने भंवरकुआं थाने में शिकायत दर्ज कराई। २६ अगस्त की दोपहर करीब १२ बजे तीन इमली चौहरा पर सुरभि बीयर बार के नीचे नाले के पास दो थैलों में उसका कई टुकड़ों में शव मिला। थैलों में उसकी गर्दन, दोनों हाथ, दोनों पैर, सिर अलग-अलग हिस्से में था। लंबी जांच, लाखों कॉल डिटेल, दर्जनों लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस ने ९ दिसंबर २०१५ को कविता की हत्या के आरोप में महेश बैरागी को गिरफ्तार किया। उसके बाद से ही वह जेल में बंद था। पुलिस का आरोप था कि कविता अपना कुर्ता लेने उसकी दुकान पर गई और वह उसे आइडीए कॉलोनी में टीकम देवड़ा के फ्लैट पर ले गया। जबरदस्ती की कोशिश में हाथापाई के बीच कविता के सर पर लोहे की रॉड मारकर हत्या कर दी। उसकी लाश के टुकड़े कर कविता की स्कूटर से ही उन्हें बोरे में भरकर नाले में फेंक दिया और गाड़ी नौलखा के पार्र्किंग स्टैंड में रख दी। महेश पर भादवि की धारा ३०२ और १२० बी के तहत केस दर्ज कर चालान पेश किया गया था।