साल 2016 कई हादसों का गवाह भी रहा है। हादसे अचानक ही होते हैं, लेकिन समय रहते इनसे सबक लेना बेहद जरूरी है। इससे हम खुद को और अपने चाहने वालों को बचा सकते हैं। चिडिय़ाघर से बाघिन को दो बार बाहर निकल जाना, मेडिकल के प्रवेश में गड़बड़ी, इंदौर-पटना एक्सप्रेस दुर्घटना, कारोबारी द्वारा आत्मदाह करना, डीबी सिटी में नौकर द्वारा मालिक की हत्या, आईडीए में आग, बच्चों के अपहरण की घटनाएं, हमें ये सोचने को विवश करती हैं कि आखिर चूक कहां रह गई। इनमें से अधिकतर मामलों में सबक लेते हुए एहतियातन कदम उठा लिए गए हैं और चंद मामलों में भी तीव्रता से कार्य जारी है। वर्षांत में इन्हें जानना इसलिए भी जरूरी है कि नए साल के स्वागत में हम कहीं इन्हें नजरअंदाज तो नहीं कर रहे?
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बाघिन जमुना, डीबी सिटी कांड, बच्चों की मौत जैसी घटनाएं आगाह करती हैंचिडिय़ाघरसतर्कता जरूरी : इंदौर चिडिय़ाघर में प्रतिदिन 5 हजार लोग आते हैं। उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। यहां से पहले घडिय़ाल और उसके बाद बाघिन के दो बार बाहर निकलने की घटना ने चिडिय़ाघर में आने वालों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही चिडिय़ाघर की टूटती दीवारों ने भी साफ कर दिया कि यहां पर रात के समय जानवर भी सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में यहां पिंजरों के अंदर और बाहर सुरक्षा के साथ ही अर्लाम सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने जरूरी हैं।
आगजनीतंग गलियां बनीं चुनौती : शहर में सालभर में कई घर, फैक्ट्री व अन्य जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आई हंै। वैसे तो फायर ब्रिगेड ने काफी बेहतर काम करते हुए आग को बुझाने के प्रयास किए। इस साल सिहंस्थ के लिए विशेष रूप से तैयार करवाई गए 6 फायर बाइक भी फायर ब्रिगेड को मिली है। इन्हें शहर के छह फिक्स पाइंट पर तैनात किया गया है। कुछ दिन पहले अनूप टॉकिज के पास कासलीवाल गोडाउन में लगी आग में तंग रास्ता काफी परेशानी बनी।
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बिजली रीडिंग में गड़बड़ी: बिजली कंपनी को आए दिन मीटर रीडिंग और बिलों में गड़बड़ी को लेकर उपभोक्ताओं से जुझने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था। कंपनी ने सबक लेते हुए फोटोयक्त रीडिंग शुरू करने का निर्णय लिया। मीटर रीडरों की मनमानी पर लगाम लगाने के साथ ही विवादों को विराम देने के लिए मीटर रीडिंग फोटोयुक्त अनिवार्य की गई और इसका फोटो भी बिल पर भेजना शुरू कर दिया गया है। अब अधिकतर बिजली उपभोक्ता को फोटोयुक्त बिजली बिल मिलना शुरू हो गए हंै।
एमवायएचदो मासूमों की मौत : इस साल जून में एमवायएच में दो बच्चों को ऑक्सीजन की जगह बेहोश करने वाली गैस दे दी गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। नवनिर्मित मॉड्यूलर पेडियाट्रिक ओटी में लोकार्पण के बाद 24 व 25 जून को बच्चों के ऑपरेशन हुए थे। खंडवा निवासी आयुष (8) पिता गणेश और जावरा निवासी डेढ़ वर्षीय राजवीर पिता बालाराम ने भी ऑपरेशन के दो दिन बाद वार्ड में ही वेंटिलेटर पर दम तोड़ दिया था। फिलहाल उक्त मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
लापरवाहीनौकर जांच कर ही रखें : 6 नवंबर को अपोलो डीबी सिटी में रहने वाले श्रीचंद्र मित्तल, पत्नी शांति मित्तल की हत्या हो गई। श्रीचंद की देखरेख के लिए रखे गए केयर टेकर मनोज के मन में लालच आया और उसने साथी धर्मेंद्र के साथ मिलकर दंपती की हत्या कर दी। गुलमोहर कॉलोनी में 12 अगस्त को ओमप्रकाश खुराना की हत्या में घर का नौकर विनोद यादव शामिल था। इनसे सबक लेकर नौकर अथवा किराएदार रखने के पहले पूरी तरह से जांच करना आवश्यक है।
इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे ने उघाड़ी खामियां20 नवंबर की सुबह वह काली सुबह थी जिसने नींद में सोते लोगों को मौत के आगोश में सुला दिया। इंदौर-पटना एक्सप्रेस तड़के करीब 3.30 बजे दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। इस दुर्घटना में करीब सवा सौ लोगों की मौत हुई और काफी अधिक संख्या में लोग घायल हुए। यह दुर्घटना रेलवे की एक बड़ी चूक है। दुर्घटना के समय भी पिटलाइन व डिपो की अव्यवस्था सामने आई जिसने कहीं न कहीं रेलवे की लापरवाही उजागर कर दी।
व्यापारी के आत्मदाह के बाद जागा प्रशासनकलेक्टर को शिकायत और एसडीएम को फोन कर आत्मदाह की धमकी देने के बाद भी नहीं जागे प्रशासन को बाद में सबक मिला। व्यापारी रवींद्र जोशी ने रीगल पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह कर लिया। बाद में उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद से प्रशासन ने सबक लेकर सतर्कता बरतना शुरू किया। इसके बाद तीन लोगों ने आत्मदाह की धमकी दी। इस पर सभी को बुलाकर उनकी समस्याओं को सुना गया और हल निकालने का प्रयास भी किया। बाद में कलेक्टर ने इस तरह की धमकी देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
350 फाइलें जलने के बाद सहेजे दस्तावेजपूरे शहर में नई योजनाएं लाकर प्रॉपर्टी बेचने वाला इंदौर विकास प्राधिकरण 3 नवंबर को लगी आग में खतरे में आ गया था। प्राधिकरण के संपदा शाखा के कमरा नंबर 104 में आग लगने से वहां की तमाम लापरवाही सामने आ गई थी। आग के बाद सबक लेते हुए रिकॉर्ड को हाईटेक तरीके संरक्षित करने का फैसला लिया है। आईडीए अध्यक्ष शंकर लालवानी ने तुरंत सभी रिकॉर्ड को स्कैन कर डिजिटलाइज करने के निर्देश दिए।
जुर्माना भरा, अब सीट भी छोडऩा पड़ेगी खालीइस बार जुलाई-अगस्त में हुए एमबीबीएस काउंसलिंग प्रदेश सरकार ने करवाई। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 2 सेंटर भोपाल व इंदौर में बनाए। 7 अगस्त तक काउसंलिंग पूरी करना थी लेकिन कॉलेजों की गड़बड़ी की वजह से करीब 38 सीटों पर अतिरिक्त एडमिशन हो गए। बाद में उक्त एडमिशन निरस्त कर दिए गए जिस पर पहले ही एडमिशन पा चुके छात्रों ने हाई कोर्ट की शरण ली। हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में छात्रों को एडमिशन देने के साथ ही 10 हजार रुपए का जुर्माना भी शासन पर ठोंका। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने एडमिशन यथावत रखे।
जनप्रतिनिधियों और अफसरों के झगड़े न होंशहर को चलाने वाली शहरी सरकार (नगर निगम) में अफसरों और पार्षदों के बीच समन्वय बना रहना जरूरी है। साल 2016 में लोकतंत्र के दो स्तंभों विधायिका और कार्यपालिका के बीच आपसी मतभेद जमकर सामने आए।
रेडिसन चौराहे के विकास को लेकर ये विवाद हुआ। रिंग रोड की सर्विस लेन को चौराहे के विकास के नाम पर बंद कर दिया गया था। जिसके बारे में पार्षद ने आरोप लगाया कि उन्हें बगैर बताए जनता का रास्ता रोका गया। पार्षद जनता के साथ सड़क पर आ गईं। वहीं इस मामले को देखने गए अपर आयुक्त को एक व्यक्ति ने सबके सामने चांटा मार दिया। जिसके बाद अपर आयुक्त की रिपोर्ट पर पुलिस ने पार्षद सहित उनके समर्थकों पर केस दर्ज कर लिया। इस मामले में पार्षद को आठ दिन जेल में रहना पड़ा। अफसरों और पार्षदों के बीच आपसी समन्वय की कमी के कारण ये हादसा पेश आया। इस घटना ने सबक दे दिया कि कार्यपालिका और विधायिका में समन्वय होना बेहद जरूरी है।
बच्चों के मामले में सतर्कता बेहद आवश्यकशहर में छोटे बच्चों के अपहरण के मामले इस साल काफी रहे। गनीमत रही कि सभी मामलो में बच्चे सुरक्षित वापस मिल गए। इन घटनाओं से पुलिस के साथ परिवार को भी एक गंभीर सबक लेने की जरूरत है। छोटे बच्चे नासमझ होते हैं। वो किसी भी परिस्थिति में ढल जाते हंै। कोई भी उन्हें आसानी से अपनी बातों में ले लेता है। ऐसे में जरूरी है कि परिवार के लोग अपने छोटे बच्चों का काफी ध्यान रखें। किसी भी स्थिति में उन्हें अकेला ना छोड़ें। खेलते समय भी कोई ना कोई उन पर नजर जरूर रखे। बच्चों की सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी परिवार की ही रहती है। इस के बाद पुलिस की अहम जिम्मेदारी है कि वो इन मामलों को लेकर जागरूकता अभियान चलाए। कॉलोनियों में भी गश्त बढ़ाई जाए ताकि फालतू घूमने वालों पर नजर रखी जा सके।
बच्चों के अपहरण की प्रमुख घटनाएं25 फरवरी को एमवाय अस्पताल से नवजात बच्चे को दो महिलाएं अपहरण कर ले गईं।
3 अप्रैल को एमवाय अस्पताल से 3 महीने के बच्चे का अपहरण कर लिया गया।
14 अप्रैल को स्कीम 134 निवासी विनायक गुर्जर का घर के पास से अपहरण कर लिया गया। हालांकि उसे बाद में बदमाश खुद ही छोड़ गए।
30 जुलाई को रामकृष्णबाग निवासी गणेश (4) का भी घर के बाहर से एक युवती ने अपहरण कर लिया। बाद में उसे युवती ही वापस छोड़ भी गई।
14 दिसंबर को धीरज नगर से शिवा (6) उसकी बहन अर्चना (4) का एक महिला अपहरण कर ले गई। शिवा तो उसी दिन मयूर हॉस्पिटल के पास लावारिस हालत में मिल गया जबकि अर्चना उज्जैन में मिली।
24 दिसंबर को स्वास्थ्य नगर से पायल सोलंकी (8) नाम की बच्ची को एक युवती ऑटो रिक्शा से अपहरण कर ले गई।
हादसों के कारणों के प्रति गंभीर होने की जरूरतनागेश नामजोशी, समाजसेवीहादसे, दुर्घटनाएं तो अचानक होते हैं, लेकिन इन हादसों से हमने क्या सबक लिया यह महत्वपूर्ण होता है। इंदौर-पटना ट्रेन की दुर्घटना की बात करें तो जिन लोगों की जिम्मेदारी उसे चेक करने की थी, उन्हें यह सोचकर काम करना चाहिए कि हमारी छोटी सी चूक किसी के जीवन पर भारी पड़ सकती है।
किसी की चूक का ही नतीजा है कि सवा सौ लोगों की जान चली गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए। जिम्मेदार अफसरों को यह भी सोचना चाहिए कि हताहत लोगों में कोई अपना होता तो हम पर क्या गुजरती? ऐसा करने पर शायद उन्हें प्रभावित लोगों को दर्द समझ में आएगा। जब इसे फील करेंगे तो गंभीरता अपने आप आ जाएगी। हादसे तो अचानक हो जाते है लेकिन यह देखना चाहिए कि उनसे हमने सबक क्या लिया? कारणों पर गंभीर होने की जरूरत है। हादसे का कारण जानना जरूरी है, फिर सबक लेते हुए अपनी ओर से इस तरह से प्रयास करें कि भविष्य में हमसे कोई चूक न हो। भविष्य को लेकर सजगता रहेगी तो हादसे की पुनरावृत्ति न होगी और निर्दोष लोगों को जान खोने से बचाया जा सकता है। दुर्घटना, हादसों से जरूरी है अपनी जिम्मेदारी को प्रति गंभीर होना। हादसे रोक तो नहीं सकते लेकिन अगर कम कर देते है तो यह भी जीवन की एक बड़ी सफलता ही मानी जाएगी।