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अब आप भी घर बैठे पुलिस को बता सकेंगे अपनी प्रॉबल्म, ऑन द स्पॉट होगा फैसला

आवेदक और अफसरों के बीच सीधी बात होने से तुरंत निर्णय होता है....

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police sitting

इंदौर। अब किसी भी पीड़ित को पुलिस को बुलाने के लिए पापड़ नहीं बेलने पड़ेंगे। अफसर के पास शिकायत लेकर जाओ तो वह पहले थाना प्रभारी व जांच अधिकारी को तलब करते हैं, मामला समझते हैं और फिर फैसला लेते हैं। इसमें कई दिन निकल जाते हैं और पीड़ित चक्कर पर चक्कर काटता है। जोन 1 के डीसीपी आदित्य मिश्रा ने लोगों को राहत देने के लिए डिजिटल जनसुनवाई का नवाचार किया है। डीसीपी के साथ एसीपी-टीआइ व जांच अधिकारी शिकायतकर्ता के साथ एक प्लेटफॉर्म पर होते हैं। सभी की बात सुनकर फैसला ऑन द स्पॉट किया जाता है।

पहले ऐसा होता था

थानों में शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई नहीं होती है। अगर राजेंद्र नगर अथवा राऊ की शिकायत हो तो पीड़ित को बड़वाली चौकी स्थित एडिशनल डीसीपी, गांधी नगर में एसीपी के ऑफिस जाना पड़ता है। वहां भी बात न बने तो रीगल तिराहा स्थित डीसीपी जोन 1 के ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे। डीसीपी मिश्रा ने अपने जोन के हर थाने में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम बनवाया है। लैपटॉप, माइक्रोफोन की व्यवस्था है। वीसी ऐप का लाइसेंस ले लिया है। जल्द ही लोगों को वेब एड्रेस उपलब्ध कराया जाएगा।

पहले ऐसा होता था

थानों में शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई नहीं होती है। अगर राजेंद्र नगर अथवा राऊ की शिकायत हो तो पीड़ित को बड़वाली चौकी स्थित एडिशनल डीसीपी, गांधी नगर में एसीपी के ऑफिस जाना पड़ता है। वहां भी बात न बने तो रीगल तिराहा स्थित डीसीपी जोन 1 के ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे।

100 मामले निपटे

डिजिटल जनसुनवाई में 7 दिन में करीब 100 मामले निपट गए। राजेंद्र नगर थाने में पदस्थ रहे एसआइ डी. चौहान को लापरवाही पर सस्पेंड करने के आदेश हुए, तीन एएसआइ सहित अन्य को हटाया। कई लोगों को अच्छे काम पर इनाम भी मिला।

तुरंत निर्णय, समय भी बचता है

मामलों के त्वरित निराकरण के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई शुरू की है। आवेदक और अफसरों में सीधा संवाद होने से तुरंत निर्णय होता है। सभी का समय भी बचता है। पीड़ित थाने आकर भी वीसी के जरिए अपनी बात रख सकते हैं। जल्द ही उन्हें वेब एड्रेस दिया जाएगा, जिससे वे कहीं से भी पुलिस से जुड़ सकते हैं। -आदित्य मिश्रा, डीसीपी जोन-1

ऐसे होती है वीसी

-डीसीपी जोन 1 के ऑफिस में शेड्यूल तैयार होता है। पीड़ितों को 15-15 मिनट का समय दिया जाता है।

-ऐप्लीकेशन के जरिए डीसीपी के साथ उनकी टीम बैठती है। एसीपी-टीआइ व संबंधित केस के जांच अधिकारी भी नजर आते हैं।

-पीड़ित की समस्या पर जांच अधिकारी से जवाब मांगा जाता है। जांच अधिकारी के जवाब से संतुष्ट हुए तो ठीक अन्यथा एसीपी-टीआइ बात करते हैं।

-डीसीपी ऑन द स्पॉट फैसला सुनाकर कार्रवाई के आदेश देते हैं और केस खत्म।