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नीति आयोग ने एक लाख करोड़ की ई-कॉमर्स डील को दिखाई हरी झंडी, कहा, सौदा हुआ है नियमों के अनुरूप

जहां एक ओर सरकार की ओर से फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट डील को हरी झंडी मिल गई है। वहीं रिटेल कारोबारियों ने इस डील का विरोध जाहिर किया है।

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नई दिल्‍ली। दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स डील के बाद कई लोगों के रिएक्‍शन आ रहे हैं। जहां एक ओर सरकार की ओर से इस डील को हरी झंडी मिल गई है। वहीं रिटेल कारोबारियों ने इस डील का विरोध जाहिर किया है। व्‍यापारियों का मानना है कि इस डील से छोटे रिलेटर्स को नुकसान होगा और कई लाख लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ेगा। आइए आपको भी बताते हैं कि इस डील के बाद सरकार ने इस बारे में क्‍या कहा? वहीं रिलेटर्स का इस डील के बारे में विस्‍तार से क्‍या कहना है? आपको बता दें कि रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने भारत की लीडिंग ऑनलाइन रिटेल कंपनी फ्लिपकार्ट को खरीद लिया है। वॉलमार्ट, फ्लिपकार्ट में 77 फीसदी हिस्सा अपने पास रखेगी। ऑनलाइन सेक्टर में ये भारत की सबसे बड़ी डील है जिसकी कीमत 16 अरब डॉलर है। ये डील साल के अंत तक पूरी होगी। फ्लिपकार्ट को लिस्ट कराने की भी तैयारी है।

डील को मिला सरकार का समर्थन
फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट डील को सरकार की ओर से समर्थन मिल गया है। इस डील के बारे में नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष राजीव कुमार की ओर से आए बयान में कहा गया है कि ये डील नियमों के मुताबिक हुई है। वो वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट डील से संतुष्ट हैं। ये डील देश के एफडीआई कानून के मुताबिक हुई है। भारत पर विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ा है। वॉलमार्ट भारत को एक्सपोर्ट हब बनाएगा। डील में नियमों के उल्लंघन का सवाल ही नहीं है। देश में बी2बी ई-कॉमर्स में 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत है। वॉलमार्ट ने नियमों के मुताबिक ही डील की है। देश में मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई लाने की छूट है। छूट देना राज्य सरकारों के हाथ में है।

पहले किया था विरोध
मन‍मोहन सिंह सरकार के समय पर एफडीआई को लेकर काम कर रही थी। जिसके बाद विपक्ष में बैठी बीजेपी ने एफडीआई का विरोध किया था। उस दौरान बीजेपी नेताओं ने अपने बयान में कहा थी कि एफडीआई से देश का मार्केट विदेशी हाथों में चला जाएगा। देश के रिलेटर्स को भारी नुकसान होगा। व्‍यापारी वर्ग सड़क पर आ जाएगा। आज जब बीजेपी केंद्रीय सत्‍ता में काबिज है तो तो एफडीआई का समर्थन किया जा रहा है।

व्‍यापारियों की ओर से किया गया विरोध
दूसरी ओर रिटेल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस डील का विरोध किया है। एसोसिएशन के अनुसार फ्लिपकार्ट और वॉलमार्ट डील में एफडीआई नियमों का उल्लंघन हुआ है। एसोसिएशन के सीईओ कुमार राजगोपालन का कहना है कि अगर सरकार ने एक्शन नहीं लिया तो इंडस्ट्री पर गलत असर पड़ेगा। फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट डील पर उन्होंने आगे कहा कि ई-कॉमर्स कंपनियां एफडीआई लेकर आ रही हैं। विदेशी पूंजी से कंपनियां दाम में मोलभाव करेंगी। कीमतों से छेड़छाड़ सरकार की एफडीआई पॉलिसी के खिलाफ है। मार्केट प्लेस के लिए सरकार ने प्रेस नोट 3 दिया है। अगर एक्शन नहीं लिया गया तो ये इंडस्ट्री के लिए खराब साबित होगा।