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बिटकॉइन की सफलता के पीछे है ये टेक्नॉलिजी

इस टेक्नॉलिजी का इस्तेमाल करेगा देश का सबसे बड़ा बैंक

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नई दिल्ली।बिटकॉइन की चर्चा आजकल जोरों पर है। लेकिन इसके पीछे इस्तेमाल की गई तकनीक जिसे ब्लॉकचैन कहा जाता है। इस तकनीक ने कई देशों के कई सेक्टर की स्थिति में सुधार ला दिया है। अब भारत में इस टेक्नॉलिजी का इस्तेमाल जमीन से जुड़े मुद्दे और बैंकिंग वयवस्था में पारदर्शिता लाने पर किया जाएगा। इसके लिए देश के दो राज्य आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में लैंड डील्स के लिए इसकी टेस्टिंग शुरप की जा चुकी है। वहीं भारत का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने बैंकिंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए इसकी टेस्टिंग दिसंबर से शुरु करने जा रही है।

ब्लॉकचैन से ऐसे होगा सुधार

भारत जैसे देश में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड्स में पारदर्शिता की खासी कमी है। इसलिए तेलंगाना और आंध्र प्रदेश इस तकनीक का इस्तेमाल करना चाह रहे हैं। ब्लॉकचैन तकनीक में जमीन-खरीद फरोख्त से लेकर इससे जुडें तमाम रिकॉर्ड्स सुरक्षित होंगे। इसके डाटा के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं है। इस तकनीक को हैक करना भी संभव नहीं है।

बैंकिंग व्यवस्था में आएगा बदलाव

भारतीय स्टेट बैंक इस तकनीक के जरिए पूरे देश में फैले अपने सभी ब्रांच को जोड़ने की योजना बना रहा है। क्योंकि इस तकनीक में ऐसी खासियत है कि अगर कोई कंप्युटर यदि खराब भी हो जाता है तो तभी ये तकनीक अपना काम करता रहेगा। जिससे वहां सेव किया हुआ कोई डाटा नष्ट नहीं होगा। वहीं अगर कोई नया समझौता या रिकॉर्ड दर्ज कराना हो तो इसके लिए कई साझेदारों की स्वीकृति जरुरी होगी।

क्या है ब्लॉकचैन तकनीक

यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें सभी तरह के वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड एक साथ रखा जाता है। यह पूरी तरह से डिजिटल सिस्टम पर कार्य करता है। जो अपने नेटवर्क पर समान जानकारी के ब्लॉक को संग्रहित कर सकता है। ब्लॉकचैन डिजिटल जानकारी (डेटाबेस) को वितरित करने की क्षमता रखता है। जिसके कारण डाटाबेस में सुरक्षित किया गये डाटा एक साथ 1000 कंप्युटर्स पर वितरित किए जा सकते हैं।

बिटकॉइन में इस्तेमाल होती ब्लॉकचैन तकनीक

बिटकॉइन की सफलता के पीछे ब्लॉकचैन तकनीक की अहम भूमिका है। क्योंकि पूरी तरह से सुरक्षित होने के कारण इसका कही भी गलत इस्तेमाल नहीं हो पाता।