
आरबीआइ की बड़ी कार्रवार्इ, विदेशी निवेश करना हैं तो रखना होगा अच्छा ट्रैकर रिकाॅर्ड
नर्इ दिल्ली। कर्इ कंपनियां देश से पैसे बाहर भेजने आैर कर्ज की रकम को डायवर्ट करने के लिए विदेशी निवेश का रूट अपनी रहीं थी। लेकिन अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीअाइ) इनपर नकेल कसने वाली है। अारबीआइ के नए नियमाें के मुताबिक, अब उन्हीं विदेशी इकाइयों आैर ज्वाइंट वेंचर्स में निवेश करने की मंजूरी दी जाएगी, जिनका ट्रैक रिकाॅर्ड बेहतर होगा। मौजूदा नियमाें के मुताबिक भारतीय कंपनियों को विदेशोें में अपनी नेटवर्थ का चार गुना तक ही निवेश करने की इजाजत है लेकिन कंपनियां इसकी दुरूपयोग करती आर्इं हैं।
कंपनी करती थी विदेशी निवेश का दुरूपयोग
भारतीय रिजर्व बैंक ने 15 दिन पहले ही आेवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (आेडीआइ) को लेकर सलाहकारों आैर कानूनी जानकारों के साथ हुर्इ बैठक के बाद ही इसके संकते दे दिए थे। आरबीअाइ ट्रैक रिकाॅर्ड के लिए कंपनियों के पिछले तीन वित्त वर्ष का मुनाफा आैर आैसत मुनाफा को आधार बनाएगी। दरअसल पिछले कुछ दिनों में कर्इ एेसे मामले सामने आएं हैं जिनमें कंपनी के नेटवर्थ के चार गुना तक निवेश के नियमों को दुरूपयोग किया गया है। कंपनियों ने इस बात का हवाला दिया था कि वो सब्सिडयरी आैर ज्वाइंट वेंचर के रास्ते दूसरे देशाें में भारतीय कंपनियों को बढ़ावा दे रही हैं।
कंपनियों के फाॅरेंसिक रिपोर्ट से पता चला
बैंक डिफाॅल्ट के बाद कंपनियों के फारेंसिक आॅडिट में ये बात सामने आया कि आेडीआर्इ जैस रूट का इस्तेमाल गबन के लिए किया जा रहा है। एक दवा कंपनी के हालिया आॅडिट में पता चला कि इस कंपनी ने अफ्रीका में कर्इ सब्सिडियरी में निवेश किया है। इस निवेश से कंपनी को बहुत ही कम रिटर्न मिला है। इन विदेशी सब्सिडियरीज से भारती पेरेंट कंपनी को डिविडेंड भी नहीं दिया आैर वो खुद घाटे में चल रही है।
हो सकता है अच्छा प्रस्ताव
इस विषय से जुड़े जानकारों का कहना है कि, ‘विदेशी इकाई में अपना और कर्ज का पैसा लगाने की इजाजत है, इसलिए इसमें फंड के गबन की आशंका रहती है। खासतौर पर नई कंपनियों की तरफ से। कानूनी तौर पर कंपनियों की ऐसी हरकत रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए ओडीआई के लिए कुछ शर्तें तय करने में कोई बुराई नहीं है। यह अच्छा प्रस्ताव है। सिर्फ असली कंपनियों को ही ओडीआई रूल का फायदा मिलना चाहिए।'
Published on:
28 May 2018 03:21 pm
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