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अब टैरिफ के नाम पर धांधली नहीं कर पाएंगी टेलीकॉम कपंनियां, TRAI पेश करने जा रही सुझाव

TRAI अपने सुझाव पेश करने वाला है, जिससे टैरिफ को पारदर्शी बनाने और ऐसी ही कुछ और कमियों को दूर करने का फैसला लिया जाएगा।

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Manish Ranjan

Jan 17, 2018

TRAI

नई दिल्ली। रिलायंस जियो इंफोकॉम के लॉन्च होने के साथ ही उसकी मौजूदा कंपनियों से रेस चल रही है। कभी टैरिफ को लेकर तो कभी नए ऑफर्स के चलते जियो और बाकी प्रतियोगी कंपनियों के बीच 'वॉर' का सिलसिला चलता रहा है। अब इसके संबंध में टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) अपने सुझाव पेश करने वाला है, जिसके चलते टैरिफ को पारदर्शी बनाने और ऐसी ही कुछ और कमियों को दूर करने का फैसला लिया जाएगा।

किसी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं
इस मामले में एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत के दौरान ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने कहा हम डेटा ओनरशिप, प्रिवेसी और सिक्यॉरिटी पर अपने सुझाव फरवरी के अंत या मार्च में पेश करेंगे। उन्होंने कहा, 'हम टैरिफ पर सुझाव तैयार कर चुके हैं। इन्हें कुछ ही दिनों में जारी कर दिया जाएगा। ये सुझाव पारदर्शी ट्रैफिक स्ट्रक्चर बनाने में मददगार साबित होंगे।' उन्होंने बताया कि इसमें किसी भी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। इसके बाद यह सुझाव जस्टिस श्रीकृष्ण समिति के सामने पेश की जायेगी जो की देश में डेटा प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क पर काम कर रही है।

जियो लॉन्च के बाद उठा था विवाद
जब जियो लांच हुआ था तब इस कंपनी ने 6 महीने तक फ्री सर्विस ऑफर दिया था। हालांकि जियो ने इस ऑफर की समयसीमा अलग नाम के साथ और बढ़ाने का ऐलान किया था। लेकिन बाकी अन्य कंपनियों के कड़े विरोध के बाद उसे यह ऐलान वापस लेना पड़ा। इस ऑफर के ऐलान पर भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर ने आरोप लगाते हुए कहा था कि जियो प्रमोशनल स्कीम्स की गाइडलाइंस का उल्लंघन कर रही है।उन्होंने कहा इस गाइडलाइन में सिर्फ 90 दिनों तक ऐसी स्कीम देने की छूट है। इन कंपनियों ने इसे लागत से कम रेट पर दी जाने वाली सर्विस बताते हुए इसके खिलाफ टेलिकॉम ट्राइब्यूनल में अपील भी की थी, हालांकि अभी इसपर कोई फैसला नहीं आया है। बता दें इसके बाद ट्राई ने फरवरी 2017 में टैरिफ असेसमेंट के रेग्युलेटरी सिद्धांतों का एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया था। जिसमें उसने प्रमोशन ऑफर्स और उसके फीचर्स पर राय मांगी थी।

सिचुएशन के आधार पर ही बनते हैं कानून :ट्राई के चेयरमैन
शर्मा ने कहा कि इन सुझावों में यह ध्यान रखा गया है कि इस तरह की सभी कमियां दूर हो सकें। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि हम रियल टाइम में कोई कानून नहीं बना सकते। उन्होंने कहा 'हमें यह समझना चाहिए कि इंडस्ट्री में कोई स्थिति सामने आने के बाद ही उसे लेकर रेग्युलेशंस बनाए जाते हैं। रियल टाइम में कोई कानून नहीं बनाया जा सकता। और ऐसा करने से समस्याएं बढ़ सकती हैं।' उन्होंने कहा आप बीमारी होने से पहले उसका इलाज नहीं कर सकते।