scriptWhy this world's largest oil company became necessary for India | भारत के लिए क्यों जरूरी बन गई दुनिया की यह सबसे बड़ी ऑयल कंपनी | Patrika News

भारत के लिए क्यों जरूरी बन गई दुनिया की यह सबसे बड़ी ऑयल कंपनी

  • दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल प्रॉड्यूसर भारत में करने जा रही है 45 बिलियन डॉलर का निवेश
  • अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के निवेश से देश में ऑयल आपूर्ति की समस्या में लगेगा विराम
  • देश में ऑयल और एनर्जी सेक्टर में देखने को मिलेगी नई नौकरियां, आरआईएल हो सकता है पार्टनर

नई दिल्ली

Updated: October 30, 2020 12:51:46 pm

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादकों में से एक अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) ने घोषणा की है कि वह भारत में डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल्स स्पेस में निवेश करने के लिए भारतीय साझेदार कंपनियों की तलाश कर रही है। सवाल यह है कि आखिर अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी की निवेश योजनाएं इंडिया की इतनी जरूरी क्यों है और भारत में कंपनी का संभावित भागीदार कौन हो सकता है?

Why this world's largest oil company became necessary for India
Why this world's largest oil company became necessary for India

आखिर कहां और किसमें निवेश करना चाहती है एडीएनओसी?
एडीएनओसी ने 2018 में घोषणा की थी कि वह अपने शोधन और पेट्रोकेमिकल कार्यों के विस्तार के लिए पांच वर्षों में $ 45 बिलियन का निवेश करने की योजना बना रही है। कंपनी ने कहा है कि उसकी भारत जैसे विदेशी बाजारों में निवेश करने की योजना है जहां तेल की खपत बढ़ रही है।
एडीएनओसी ने रत्नागिरी रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड में 50 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए सऊदी अरामको के साथ संयुक्त रूप से अन्य 50 फीसदी हिस्सेदारी के साथ राज्य के स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और के साथ समझौता किया है। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड रत्नागिरी रिफाइनरी जो 2025 में चालू होने की उम्मीद है, अभी भी भूमि अधिग्रहण में बाधाओं का सामना कर रही है।

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एडीएनओसी भारत की स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में निवेश करने वाली एकमात्र विदेशी कंपनी है, जिसने पडूर में रणनीतिक भंडार में कच्चे तेल का भंडारण किया है। कंपनी भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में निवेश का विस्तार करना चाहती है।

एडीएनओसी के लिए संभावित भागीदार कौन हो सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, एडीएनओसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज या प्रमुख राज्य के स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियों के साथ साझेदारी करेगा, जो एडीएनओसी को मार्केटिंग और ऑपरेशन में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि भारतीय प्लेयर्स को तकनीकी जानकारों से फायदा हो सकता है और एडीएनओसी जैसे वैश्विक तेल प्रमुख के साथ साझेदारी करने से कच्चा माल अधिक आसानी से मिल सकता है। विशेष रूप से एडीएनओसी पहले से ही अबू धाबी में रुवैस कॉम्प्लेक्स में एथिलीन डाइक्लोराइड सुविधा के विकास का पता लगाने के लिए योजना बना रहा है। जिसके तहत दिसंबर 2019 में कंपनी की ओर आरआईएल के साथ एक समझौता भी किया था।

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