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बैल निकालते हैं रस, गुजरे जमाने की तकनीक मिली देखने

ये जितना आश्चर्यचकित करता है उतना बीते जमाने की भी यादें ताजा करता है।

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Abha Sen

Jan 06, 2016

जबलपुर। कोल्हू के बैल, अक्सर ही ये कहावत सुनने मिलती है, लेकिन अब भी कुछ ऐसे स्थान है जहां कोल्हू के बैल देखने मिलते हैं। आज के मशीनी युग में बैलों को कोल्हू में जोतकर काम कराया जाता है। ये जितना आश्चर्यचकित करता है उतना बीते जमाने की भी यादें ताजा करता है।

किसी जमाने में कोल्हू के बैल को जोतकर कृषि कार्यो से लेकर तेल निकालने, अनाज पिसवाने और गन्ने का रस निकालने आदि में प्रयोग किया जाता था। बदलते वक्त के साथ परिवर्तन आया और अब इनकी जगह मशीनों ने ले ली। लेकिन अब भी जबलपुर क्षेत्र लगे हुए कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में कोल्हू के बैल का आवश्यकतानुसार उपयोग कर लिया जाता है। हालांकि इनका उपयोग घरेलू कार्यों तक ही सीमित है।

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