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स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन के डायरेक्टर को पद से हटाने पर रोक

जबलपुर हाईकोर्ट में चल रहा है मामला      

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Court of District Sessions Judge verdict….life imprisonment of murderar

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के न्यायाधीश एमएस भट्टी की एकलपीठ ने संभागायुक्त जबलपुर के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसके तहत नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पलमोनरी साइंस के डायरेक्टर को पद से हटा कर प्रभार डीन को सौंप दिया था। एकलपीठ ने कहा कि डॉ. जितेन्द्र भार्गव पद पर बने रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि बिना अनुशासनात्मक कार्रवाई के डायरेक्टर को पद से हटाना नियमों के तहत नहीं है। एकलपीठ ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव व आयुक्त, संभागायुक्त जबलपुर और मेडिकल कॉलेज जबलपुर के सीईओ व मेडिकल कॉलेज की डीन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह है मामला

डॉ. भार्गव की ओर से दायर याचिका में बताया कि संभागायुक्त (प्रशासक) ने 14 अगस्त को याचिकाकर्ता को पद से हटाकर डायरेक्टर का प्रभार प्रभारी डीन डॉ. गीता गुइन को दिया था। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि वर्ष 2019 में प्रोफेसर के पद से इस्तीफा देने के बाद डॉ भार्गव को स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पलमोनरी साइंस का डायरेक्टर बनाया था। यह पद डीन के पद के बराबर है। कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कुछ शिकायतें की गई थीं, जिनकी जांच के लिए शासन ने 14 जुलाई 2023 को तीन सदस्यी कमेटी बनाई थी। लेकिन कमेटी की रिपोर्ट आने के पहले संभागायुक्त ने 11 अगस्त को उक्त शिकायतों के आधार पर उपायुक्त व एक अन्य सदस्य की जांच समिति बना दी। याचिकाकर्ता ने कमेटी के समक्ष अपना जवाब भी पेश किया। किन्तु जांच रिपोर्ट आने के पूर्व ही संभागायुक्त ने 14 अगस्त को डॉ भार्गव को पद से हटा दिया, इसलिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता समदर्शी तिवारी ने पक्ष रखा।