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Dairy Science : जिस कॉलेज को राज्यपाल ने दी मंजूरी, उसे सरकार ले जा रही उज्जैन, आदेश रखा ठेंगे पर

शहर में डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी कॉलेज की स्थापना के प्रस्ताव को राज्यपाल ने मंजूरी प्रदान की थी। इस प्रस्ताव में बिना उनकी अनुमति के किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकता है।

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Dairy Science : शहर में डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी कॉलेज की स्थापना के प्रस्ताव को राज्यपाल ने मंजूरी प्रदान की थी। इस प्रस्ताव में बिना उनकी अनुमति के किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकता है। लेकिन वेटरनरी विवि ने इसे नजरअंदाज कर दिया। जानकारों के अनुसार विवि प्रशासन ने बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना आनन-फानन में कॉलेज उज्जैन में खोले जाने का प्रस्ताव पशुपालन विभाग को भेज दिया। वेटरनरी विवि के अधिनियम में स्पष्ट बाध्यता है कि कुलाधिपति (राज्यपाल) द्वारा अनुमोदित प्रस्ताव अथवा निर्णय को कुलपति द्वारा बदला नहीं जाएगा। यह करने के पूर्व में राज्यपाल की अनुमति लेना अनिवार्य है।

Dairy Science : राजभवन में शिकायत

इस मामले को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने राज्यपाल को शिकायत भेजी है। विवि प्रशासन और कुलपति द्वारा नियमों को ताक पर रखकर प्रस्ताव बनाए जाने, उज्जैन प्रस्ताव को निरस्त कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे ने कहा कि कुलपति ने राज्यपाल की भी अनुमति नहीं ली। इस कारण राज्यपाल के पद की अवमानना हुई है। विवि ने डेयरी साइंस कॉलेज जबलपुर में स्थापना का प्रस्ताव बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट में पारित कर राज्यपाल को भेजा था। राज्यपाल ने अनुमोदित कर निर्णय पर क्रियान्वयन करने वीयू को वापस भेजा।

Dairy Science : छात्र संघ करेगा प्रदर्शन

एनएसयूआई के छात्र नेता नीलेश महार ने कहा कि शहर के साथ लगातार प्रदेश सरकार द्वारा अनदेखी की जा रही है। छात्र संघ इस मामले में मुयमंत्री, पशुपालन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेगा। अदनान अंसारी ने कहा कि सरकार शहर में कॉललेज की स्थापना के लिए आदेश जारी करे।

डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी की पढ़ाई के लिए प्रदेश में कहीं भी संस्थान नहीं है। ऐसे में छात्रों को दूसरे राज्यों में जाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

  • डॉ. अरुण शुक्ला, काउंसलर व प्रोफेसर

शहर के हितों के साथ लगातार अनदेखी की जा रही है। चाहे वह सुविधाओं का मामला हो या फिर किसी बडे संस्थाना के आने का मामला। इससे शहर का विकास भी पीछे होता जाता है।

  • डॉ. पंकज गोयल, शिक्षाविद