
dal price in india, sabse sasti dal kaha milti he
जबलपुर. दालों पर जल्द ही बड़ा बवाल मच सकता है। इस मामले में सरकारी रुख से कुछ किसान संगठन नाराज हैं। किसान संगठनों ने सरकार को बाकायदा अल्टीमेटम भी दिया है। किसानों का कहना है कि सरकार दाल आयात कर रही है जोकि पूरी तरह किसान विरोधी कदम है। सरकार के इस कदम से किसानों की दिक्कतें और बढ़ जाएंगी। किसान संगठनों के मुताबिक सरकार का यह फैसला पूरी तरह बेतुका है क्योंकि इस बार वैसे भी दाल का उत्पादन अच्छा रहने की रिपोर्ट आई हैं। ऐसे में सरकारी फैसले का औचित्य समझ ही नहीं आ रहा है।
दाल के आयात पर रोक लगाने की मांग
गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने दाल के आयात को हरी झंडी दे दी है। दाल के आयात को मंजूरी देने पर किसान संगठनों ने नाराजगी जताई है। इस संबंध में भारत कृषक समाज आगे आया है। भारत कृषक समाज के प्रतिनिधियों ने सरकारी फैसले का जमकर विरोध किया है और दाल के आयात पर रोक लगाने की मांग की है। प्रतिनिधियों के मुताबिक सरकार का यह फैसला समझ से परे हैं। भारत कृषक समाज के केके अग्रवाल, राजनारायण भारद्वाज ने बताया कि कृषि मंत्रालय ने दाल के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान लगाया है। कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2017-18 में दाल का 245.1 लाख टन का रेकॉर्ड उत्पादन होने का अनुमान है। यह पिछले साल की तुलना में बहुत बेहतर है। गौरतलब है कि कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसा पिछले फसल सीजन में उत्पादन 231.3 लाख टन रहा।
आधी कीमत पर दलहन
प्रतिनिधियों ने कहा कि दलहन उगानेवाले किसानों की हालत बदतर होती जा रही है। घरेलू मंडियों में किसान को समर्थन मूल्य से आधी कीमत पर दलहन बेचना पड़ रहा है। किसान प्रतिनिधियों ने किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार से दाल का आयात करने का निर्णय वापस लेने की मांग की है।
Published on:
16 Jun 2018 02:43 pm
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