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Alert: एमपी में आई खतरनाक बीमारी, महाराष्ट्र में मौत बनकर बरपा रही कहर

गुइलेन-बैरे सिंड्रोम पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में कहर बरपा रही है। वहां 6 लोगों की इसी बीमारी से मौत हो चुकी है। प्रदेश में एक सप्ताह में घातक सिंड्रोम के 5 मामले सामने आने के बाद न्यूरोलॉजी चिकित्सक अलर्ट मोड पर हैं।

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Dangerous disease Aleart in MP

Dangerous disease Aleart in MP

Alert in MP : वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण के कारण फैलने वाली दुर्लभ और घातक बीमारी गुइलेन-बैरे सिंड्रोम(Guillain-Barré syndrome) के सप्ताहभर में 5 मरीज मिले हैं। पांचों मरीज मदनमहल क्षेत्र में एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज जारी है। इन मरीजों में जबलपुर का रहने वाला 10 साल का बच्चा, दमोह की 38 वर्षीय महिला, कटनी के 9 वर्षीय 4 वर्षीय बच्चे व मंडला के 65 वर्षीय बुजुर्ग शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में कहर बरपा रही है। वहां 6 लोगों की इसी बीमारी से मौत हो चुकी है। प्रदेश में एक सप्ताह में घातक सिंड्रोम के 5 मामले सामने आने के बाद न्यूरोलॉजी चिकित्सक अलर्ट मोड पर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के एक ही मरीज ही सप्ताह में आते हैं।

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प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिकाओं पर करती है हमला

गुइलेन-बैरे सिंड्रोम(Guillain-Barré syndrome) एक दुर्लभ स्वप्रतिरक्षी रोग है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली मरीज की तंत्रिकाओं पर हमला करती है। इसका कारण ज्ञात नहीं है, लेकिन यह आमतौर पर वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के बाद शुरू होता है।

गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के सप्ताहभर में 5 मरीज मिले हैं। इनमें बच्चों से लेकर युवा, बुजुर्ग शामिल हैं। यह ऑटोइम्यून बीमारी पैरों की नसों से शुरू होकर ऊपर हाथों की ओर व अन्य नसों से होते हुए ऊपरी हिस्से में पहुंच जाती है। कई मरीजों के इलाज में देर होने से उनके शरीर को बड़ा नुकसान पहुंच जाता है। -डॉ.अनुपम साहनी, न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ

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ऑटोइम्यून बीमारी

विशेषज्ञों के अनुसार गुइलेन-बैरे सिंड्रोम(Guillain-Barré syndrome) ऑटोइम्यून स्थिति है, जहां आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली परिधीय नसों पर हमला करती है। इनमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बाहर की नसें शामिल होती हैं। इसके साथ ही चेहरे, हाथ और पैरों की नसें भी शामिल हैं। शुरुआती लक्षणों में पैरों में कमजोरी या झुनझुनी महसूस होती है। जो बाद में मरीज की बांहों से लेकर पूरी शरीर तक फैल सकती है। गंभीर मामलों में, मरीज को लगभग पूरा पक्षाघात हो सकता है। ज़्यादातर मामलों में लक्षण पहले 4 सप्ताह में चरम पर पहुंच जाते हैं।