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एमपी में बिजली की खपत बढ़ी, सब्सिडी से बाहर हुए दोगुने उपभोक्ता, जाने वजह

Electricity Consumption Rise : जनवरी की तुलना में मार्च से जून के बीच बड़ी संख्या में उपभोक्ता सब्सिडी सीमा से बाहर हुए हैं। इसके चलते उन्हें निर्धारित टैरिफ के अनुसार बिजली बिल का भुगतान करना पड़ा है।
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Electricity Consumption Rise

Electricity Consumption Rise (एमपी में बिजली की खपत बढ़ी Photo Source- Patrika)

MP News : गर्मी के मौसम में घरों में बिजली की खपत बढ़ने का सीधा असर मध्य प्रदेश के उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है। जनवरी की तुलना में मार्च से जून के बीच बड़ी संख्या में बिजली उपभोक्ता 100 और 150 यूनिट की सब्सिडी सीमा से बाहर हो गए हैं। इसके चलते उन्हें निर्धारित टैरिफ के अनुसार बिजली बिल का भुगतान करना पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं का मासिक बिल, जो पहले 100 से 150 रुपए तक ही आता था, वो अब बढ़कर 500 से 2,000 रुपए तक पहुंच गया है।

जनवरी की तुलना में जून में ज्यादा खपत, गर्मी ने किया हलाकान

बिजली कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में 2,17,286 उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ मिला था, जबकि 1,15,825 उपभोक्ता सब्सिडी से बाहर हो गए थे। जून तक सब्सिडी पाने वालों की संख्या घटकर 1,25,665 ही रह गई थी, जबकि 2,11,044 उपभोक्ता सब्सिडी के दायरे से बाहर हो गए हैं। इस तरह जनवरी की तुलना में जून में सब्सिडी से बाहर होने वालों की संख्या करीब करीब दोगुनी हो गई है।

150 यूनिट खपत वाले ग्राहकों का जुटा रहे डेटा

जबलपुर बिजली कंपनी सिटी सर्किल में 100 यूनिट तथा 101 से 150 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं का विस्तृत डेटा तैयार किया गया है। इसके आधार पर ऐसे परिसरों की पहचान की जा रही है, जहां एक ही परिसर में दो बिजली मीटर लगे हैं। ऐसे में अगर दोनों मीटर अलग - अलग परिवारों के उपयोग में आ रहे हैं तो कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन अगर एक ही परिवार द्वारा दो मीटर का उपयोग कर सब्सिडी का लाभ लिया जा रहा है तो ऐसी स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मार्च से जून तक अधिक गर्मी

जबलपुर सिटी सर्किल अधीक्षण अभियंता संजय अरोरा का कहना है कि, जनवरी की तुलना में मार्च से जून तक गर्मी अधिक रही। इसके कारण कई उपभोक्ताओं की बिजली खपत बढ़ गई और वे सब्सिडी के दायरे से बाहर हो गए। मौसम में ठंडक आने के साथ खपत कम होगी तो ऐसे उपभोक्ता फिर से सब्सिडी का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।