
FASTag (फास्टैग को लेकर हाईकोर्टका फैसला Photo Source- Patrika)
MP High Court Order :जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए साफ किया कि, फास्टैग सिर्फ टोल शुल्क के डिजिटल भुगतान का माध्यम है। ये टोल कंपनियों को मनमाने ढंग से नई दरें तय करने या जनता से अवैध वसूली करने का अधिकार नहीं देता। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की कोर्ट ने देवास-भोपाल कॉरिडोर प्रा.लि. की याचिका रद्द कर दी। कंपनी पर 25 हजार जुर्माना लगाया, राशि सीएम राहत कोष में जमा होगी।
कोर्ट ने कंपनी की दलील खारिज कर कहा, 30 जून 2007 के मूल रियायत समझौते में बसों और ट्रकों के लिए टोल दरें पहले से तय थीं। कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा, जैसे कोर्ट में ई-फाइलिंग लागू होने से सिर्फ आवेदन करने का तरीका बदला है, कोर्ट शुल्क नहीं। ऐसे ही फास्टैग से भुगतान प्रक्रिया बदली, टोल की दरें नहीं। यदि सॉटवेयर में गलत मैपिंग हुई है तो यह जिमेदारी टोल ऑपरेटर की होगी, जनता की नहीं। कंपनी को प्रभावित ट्रांसपोर्टरों व वाहन मालिकों को करीब 11 करोड़ रुपए लौटाने होंगे।
प्रदेश में टोल वसूली के कई विवाद पहले भी अदालतों और विधानसभा में उठ चुके हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में भोपाल-देवास टोल रोड (लागत 345 करोड़) और जावरा-नयागांव टोल रोड (लागत 426 करोड़) पर लागत से 6 गुना अधिक, यानी 2,056 करोड़ तक टोल वसूली का मामला सामने आया। वहीं, विधानसभा में भी ये खुलासा हुआ कि, कानूनी रूप से टोल वसूली लागू होने की निर्धारित तिथि से पहले ही एमपीआरडीसी और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता से 603 करोड़ रुपए की अवैध टोल वसूली कर ली गई थी।
विवाद मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी) के 21 मई 2025 के आदेश के बाद हुआ। एमपीआरडीसी ने टोल कंपनी को 2022 से अब तक की अवैध वसूली की राशि लौटाने के निर्देश दिए। कंपनी ने आदेश को कोर्ट में चुनौती दी। तर्क दिया, फास्टैग सिस्टम की सॉफ्टवेयर मैपिंग में त्रुटि से 3 एक्सल वाली बसों को भारी वाहन मान लिया। इससे अधिक टोल राशि स्वत: कटती रही। कंपनी की गलती नहीं थी।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि, रिफंड का लाभ सिर्फ याचिका से जुड़ी एक परिवहन कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा। 2022 से अब तक जिन बस, ट्रक मालिकों से गलत टोल वसूला गया, उन सभी को राशि वापस मिलेगी। हर वाहन मालिक को रिफंड राशि का निर्धारण आपसी सहमति या मध्यस्थता के जरिए किया जाएगा। कोर्ट ने साफ किया तकनीकी गड़बड़ी का बहाना बनाकर जनता से अवैध वसूली स्वीकार नहीं की जा सकती।
Updated on:
19 Jul 2026 06:43 am
Published on:
19 Jul 2026 06:43 am
