
Electricity theft is being detected via the V-Mitra app
जबलपुर. कभी सुख-दुख में साथ खड़े होने वाले पड़ोसी अब बिजली चोरी के मामलों में एक-दूसरे के खिलाफ मुखबिरी भी कर रहे हैं। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा शुरू किए गए वी-मित्र एप ने बिजली चोरी के खिलाफ ऐसा जन अभियान खड़ा कर दिया है, जिसमें आम नागरिक खुद बिजली कंपनी की आंख और कान बन गए हैं। परिणाम यह है कि पिछले एक वर्ष में 76,086 शिकायतें दर्ज हुईं और हजारों मामलों में बिजली चोरी पकडकऱ कंपनी ने करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान को रोकने में सफलता हासिल की है।
बिजली कंपनी के आंकड़े बताते हैं कि जुलाई 2025 में वी-मित्र एप लागू होने के बाद लोगों ने बढ़-चढकऱ बिजली चोरी की सूचनाएं देना शुरू कर दिया। कंपनी के 20 जिलों में 4,118 लोगों ने गोपनीय तरीके से शिकायतें दर्ज कराईं। इन शिकायतों में से 69,434 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है, जिसमें बड़ी संख्या में बिजली चोरी और अनियमितताएं सामने आई हैं। खास बात यह है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है, जिससे लोगों का भरोसा इस व्यवस्था पर बढ़ा है।
जांच के दौरान 8,217 घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में मीटर को बायपास कर सीधे बिजली उपयोग करते हुए पाया गया। इसके अलावा 6,395 उपभोक्ताओं द्वारा गलत टैरिफ श्रेणी में बिजली उपयोग करने के मामले सामने आए। कई उपभोक्ता घरेलू कनेक्शन पर व्यवसाय चला रहे थे, जबकि कुछ स्थानों पर एक परिसर से दूसरे परिसर तक अवैध रूप से बिजली पहुंचाई जा रही थी। निर्धारित क्षमता से अधिक लोड का उपयोग, मीटर में छेड़छाड़ और अन्य तकनीकी तरीकों से बिजली चोरी के मामले भी पकड़े गए।
शिकायतों के मामले में टीकमगढ़ जिला सबसे आगे रहा, जहां 6,291 शिकायतें दर्ज हुईं। इसके बाद जबलपुर सिटी में 6,456, बालाघाट में 5,406 और सतना में 5,267 शिकायतें प्राप्त हुईं। पन्ना में 4,190, नरसिंहपुर में 4,199, रीवा में 3,921 और कटनी जिले में 3,769 शिकायतें दर्ज की गईं। इसी तरह उमरिया 3232, सिंगरौली 3516, सीधी 3465, शहडोल 3146, सिवनी 3265, सागर 2896, नरसिंहपुर 4199, मंडला 3129, कटनी 3769, जबलपुर सिटी 6456, डिंडोरी 1773, दमोह 2879, छिंदवाड़ा 3108, छतरपुर 3457, अनूपपुर 2994 शिकायत दर्ज कराई हैं।
बिजली चोरी की सूचना देने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए कंपनी ने पुरस्कार योजना लागू की है। अब तक 15,122 शिकायतों में 50 लाख 30 हजार 545 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है। इसमें सतना जिला सबसे आगे है, जहां 1,722 मुखबिरों को करीब 8 लाख रुपए का भुगतान किया गया। अधिकारियों का कहना है कि पुरस्कार योजना के कारण लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और अब ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में सूचनाएं मिल रही हैं।
प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों के सामने लाइन लॉस यानी तकनीकी और गैर-तकनीकी हानियां बड़ी समस्या बनी हुई हैं। पूर्व क्षेत्र में वर्तमान लाइन लॉस 26.66 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि खरीदी गई कुल बिजली का एक बड़ा हिस्सा चोरी, खराब व्यवस्था या अन्य कारणों से राजस्व में परिवर्तित नहीं हो पाता। मध्य क्षेत्र में यह आंकड़ा 26.96 प्रतिशत है, जबकि पश्चिम क्षेत्र सबसे बेहतर स्थिति में है, जहां लाइन लॉस 12.78 प्रतिशत है। ऊर्जा विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए पूर्व और मध्य क्षेत्र में लाइन लॉस घटाकर 14 प्रतिशत तथा पश्चिम क्षेत्र में 12 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अधिकारियों का मानना है कि केवल विजिलेंस और उडऩदस्तों के भरोसे बिजली चोरी पर नियंत्रण संभव नहीं है। आम नागरिकों की भागीदारी और तकनीकी निगरानी के संयोजन से ही इस चुनौती से निपटा जा सकता है।
वी-मित्र एप के माध्यम से कोई भी व्यक्ति बिजली चोरी की फोटो, वीडियो और स्थान संबंधी जानकारी अपलोड कर सकता है। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। शिकायत सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है और पात्र होने पर शिकायतकर्ता को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है। कंपनी का दावा है कि एप शुरू होने के बाद बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आई है और राजस्व संग्रहण में भी सुधार दर्ज किया गया है।
जिला शिकायतें शिकायतकर्ता
जबलपुर 6451 403
कटनी 3769 144
नरसिंहपुर 4199 169
मंडला 3129 209
छिंदवाड़ा 3108 188
सिवनी 3265 174
डिंडारी 1773 128
बालाघाट 5406 112
वी-मित्र एप के माध्यम बिजली चोरी पकडऩे में बड़ी मदद मिल रही है। जो भी शिकायतकर्ता होता होता है उसकी जानकारी एकदम गोपनीय रखी जाती है, किसी को भी अधिकार नहीं है कि वह देख पाए। शिकायतकर्ता को सीधे रिवॉर्ड राशि खाते में भेजी जा रही है। 10 प्रकार की शिकायतें की सकती है। बिजली चोरी पर संबंधित क्षेत्र के अधिकारी-कर्मचारी पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।
Published on:
30 Jun 2026 07:50 pm
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