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इलेक्ट्रॉनिक तराजू की तौल का बड़ा खुलासा, ऐसे लूट रहे लोगों को

आप भी करते हैं इलेक्ट्रॉनिक तराजू की तौल पर विश्वास, तो जरूर पढ़ें ये खबर  

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जबलपुर। इलेक्ट्रॉनिक वेट मशीन के नवीनीकरण की प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा हुआ है। दरअसल, बिना जांच परख के नापतौल विभाग के अधिकृत वेंडरों द्वारा धोखाधड़ी का यह खेल खेला गया है। पत्रिका एक्सपोज रिपोर्टर ने निवाडग़ंज सब्जीमंडी में लगे नापतौल विभाग के शिविर का स्टिंग किया तो यह मामला उजागर हो सका। स्टिंग के दौरान लाइसेंस रिन्यू करने वालों का कहना था कि वे मशीन के बिना ही रिन्यू कर देंगे।

about- इलेक्ट्रॉनिक वेट मशीन के नवीनीकरण में हो रहा फर्जीवाड़ा, टेंशन नहीं, कंाटा जांचे बिना ही कर देंगे रिन्यू

नापतौल विभाग द्वारा निवाडग़ंज सब्जीमंडी स्थित पुलिस सहायता केन्द्र में इलेक्ट्रॉनिक मशीन को रिन्यू कराने का शिविर लगाया गया था। शिविर में जमकर निवाडग़ंज मंडी क्षेत्र में स्थित दुकानों में लगी इलेक्ट्रिक तौल मशीन का परीक्षण कर उसे रिन्यू करना था। हालांकि, अधिकतर दुकानों में कांटों की जांच नहीं की गई।

8 लोगों के पास लाइसेंस
शहर में लगे इलेक्ट्रिक तौल मशीन के नवीनिकरण के लिए आठ वेंडरों को लाइसेंस दिया गया है। इनमें से पांच वेंडर सक्रिय है। इन वेंडरों पर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लगे इलेक्ट्रिक कांटा मशीनों की जांच का जिम्मा है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक तौल मशीनों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें कम तौल वाली मशीनों के साथ ही अधिक वजन तौल करने वाले कांटे शामिल है। इनके नवीनीकरण में दो सौ से सात सौ रुपए तक का खर्चा आता है।

इस तरह खानापूर्ति
इलेक्ट्रिक तौल मशीन में एल्यूमीनियम की प्लेट लगी होती है। इसमें संबंधित वर्ष की पंचिंग कर नवीनीकरण किया जाता है। होता यह है कि अधिकृत वेंडर प्लेट निकालकर ले जाते हैं और बाद में पंचिंग कर मशीन में दोबारा लगा देते है, जबकि नियम यह है कि पंचिंग से पहले इलेक्ट्रिक तौल मशीन को जिम्मेदारों द्वारा बारीकी से परीक्षण करना चाहिए। जांच के बाद ही नवीनीकरण मान्य होता है।
हजारों में लगी हैं

तौल मशीन
शहर और ग्रामीण इलाके में करीब दस हजार से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनें है। हर बार इनके नवीनीकरण की प्रक्रिया में लापरवाही बरती जाती है। कभी समय पर शिविर नहीं लगता तो कभी वेंडरों द्वारा अधिक मशीनों के नवीनीकरण के चक्कर में जांच नहीं की जाती।

ये कहते हैं व्यापारी
निवाडग़ंज की गल्ला और सब्जी मंडी की दुकानों में करीब चार सौ से अधिक इलेक्ट्रिक तौल मशीनें लगी है। एक दर्जन से अधिक दुकानदारों ने नाम न छापने की बात पर बताया कि उन्होंने रिन्यूअल तो कराया है लेकिन उनके कांटों की जांच नहीं की गई। व्यापारियों की मांग पर भी जांच को दरकिनार कर दिया गया। इसके अलावा कुछ एेसे दुकानदार भी मिले जिन्होंने खानापूर्ति बताते हुए पैसों की बर्बादी बताई।

नवीनीकरण करने वाले से बातचीत के अंश
- एके ठाकुर, वेंडर
- इलेक्ट्रिक तौल मशीन का नवीनीकरण हो जाएगा?
हां।
- क्या मशीन लानी पड़ेगी?
एेसा नहीं है। कितनी क्षमता वाली मशीन है आपके पास?
- ढेड़ क्विंटल वाला कांटा है?
हो जाएगा,मशीन के पीछे लगी प्लेट ले आना।
- इलेक्ट्रिक कांटे की जांच तो नहीं करानी पड़ेगी?
अरे नहीं,हमे तो बस प्लेट से मतलब है।
- तो क्या प्लेट में पंच करके दे दोगे आप?
हां।
- कितने रुपए लगेंगे?
यही करीब ५०० या ६०० रुपए।

हर बार इलेक्ट्रिक कांटों का नवीनीकरण इसी तरह होता है। कांटे की जांच करने को कहो तो देरी लगने का बहाना बताया जाता है।
- विकास कुमार

शिविर आखिरी सप्ताह में लगाया जाता है। नवीनीकरण की प्रक्रिया जल्द पूर्ण करने के चक्कर में कांटों की जांच नहीं करते। कई व्यापारी इसका गलत फायदा उठाते है।
- मोनू जैन