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employment : पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा, तीन दिन में 19 को किया बाहर, ये है वजह

जबलपुर में शुरू हुई आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में अब तक 19 आवेदकों को डिस्क्वालीफाई किया जा चुका है। इधर, हाईकोर्ट ने जीवित रोजगार पंजीयन को नौकरी के लिए गैर जरूरी माना था।

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employment :रोजगार कार्यालय में पंजीयन नहीं होना कर्मचारी चयन आयोग की ओर से आयोजित पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में आवेदकों के लिए बाधा बन गया है। जबलपुर में शुरू हुई आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में अब तक 19 आवेदकों को डिस्क्वालीफाई किया जा चुका है। इधर, हाईकोर्ट ने जीवित रोजगार पंजीयन को नौकरी के लिए गैर जरूरी माना था। इसके बावजूद आयोग की मनमानी के कारण योग्य आवेदक परेशान हो रहे हैं। पूरे प्रदेश में यह हाल हैं।

employment : रोजगार पंजीयन नहीं होना बना बाधा अपात्र हो रहे योग्य आवेदक

employment : दस स्थानों पर चल रही है भर्ती प्रक्रिया

आरक्षक भर्ती प्रक्रिया प्रदेश में जबलपुर समेत रीवा, इंदौर, उज्जैन, भोपाल, बालाघाट, मंडला, सागर, रतलाम समेत अन्य जिले में आयोजित की जा रही है। प्रतिदिन 220 आवेदकों का भौतिक और दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है। 16 अक्टूबर से छठी बटालियन में आयोजित परीक्षा में पहले दिन 170, दूसरे दिन 160 और तीसरे दिन 153 आवेदक आए। इनमें से पहले दिन नौ, दूसरे दिन सात और तीसरे दिन तीन को आवेदन की अंतिम तारीख तक रोजगार पंजीयन न होने के कारण डिस्क्वालीफाई कर दिया गया।

employment : पंजीयन और रिनुअल में देरी

आरक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आयोग द्वारा जारी विज्ञापन में कहा गया था कि आवेदन की अंतिम तारीख 10 जुलाई 2023 तक आवेदक का रोजगार पंजीयन होना चाहिए। इस तारीख में कई का पंजीयन जीवित नहीं था, लेकिन आवेदन भरने के पूर्व आवेदकों ने रोजगार पंजीयन के लिए आवेदन दिया। इसमें से कई का पंजीयन दूसरे माह में हुआ, तो कई का रिनुअल देरी से हुआ।

employment : हाईकोर्ट ने माना था गैरजरूरी

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में रोजगार कार्यालय का जीवित पंजीयन होना अनिवार्य नहीं है। नवंबर 2023 में जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने सरकार को जेल प्रहरी भर्ती प्रक्रिया से वंचित किए गए अभ्यर्थी याचिकाकर्ता की नियुक्ति मामले में निर्णय लेने के आदेश दिए थे। याचिकाकर्ता सुशील कुमार शर्मा ने जेल प्रहरी की भर्ती के लिए आवेदन किया था। लेकिन एमपी व्यावसायिक परीक्षा बोर्ड और रोजगार निदेशालय ने उसे इस आधार पर प्रक्रिया से बाहर कर दिया कि उसका रोजगार कार्यालय में जीवित पंजीयन नहीं है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोहराया कि सार्वजनिक रोजगार के लिए रोजगार कार्यालय में लाइव रजिस्ट्रेशन आवश्यक नहीं है, भले ही ऐसा प्रतिबंध संबंधित विज्ञापन में स्पष्ट रूप से दिया गया हो।