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जबलपुर। भाजपा का ऑपरेशन महाकोशल अभियान जारी है। जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू को पाले में लाने के बाद गुरुवार को पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर सिंह को भी शामिल कर लिया। जिन्होंने भोपाल के भाजपा कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला के हाथों भाजपा की सदस्यता ली। शशांक कांग्रेस के लीगल सेल को हेड कर रहे थे। इस तरह की भगदड़ से कांग्रेस के सामने अपना कुनबा बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
नगरनिगम की सत्ता पलट करते हुए महापौर जगत बहादुर ने बुधवार को भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। अभी वह भोपाल में ही हैं, जबलपुर नहीं लौटे हैं। हालांकि उनके भाजपा में आने से स्थानीय नेताओं में खास चर्चा नहीं है। पार्टी की महानगर इकाई ने अभी तक किसी तरह का अधिकारिक बयान नहीं दिया है। नई एमआइसी के गठन को लेकर भी अधिक हलचल नहीं है। लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता आग बबूला हैं। बुधवार से ही शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन गुरुवार को भी जारी रहा। हालांकि पार्टी के बड़े नेता इससे दूरी बनाए हुए हैं और टिप्पणी भी नहीं कर रहे हैं।
नेमप्लेट पर कालिख पोती, गौरीघाट पर प्रदर्शन
सत्ता पलट से आहत कांग्रेस कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। गुरुवार को कुछ कार्यकर्ताओं ने नगरनिगम के बगल में स्थित महापौर निवास के बाहर प्रदर्शन करते हुए इस्तीफे की मांग की। इस दौरान नारेबाजी करते हुए किसी ने गेट पर लगी नेमप्लेट पर कालिख पोत दी। वहीं, कांग्रेस सेवादल के कार्यकर्ताओं ने गौरीघाट तक मातमी यात्रा निकाली और प्रदर्शन करते हुए कहा कि उनके लिए अब जगत बहादुर सिंह अन्नू का अस्तित्व नहीं है। प्रतीकात्मक तर्पण भी किया।
तन्खा बोले- मना किया था पर नहीं माने
पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर सिंह और महापौर अन्नू को अनमोल रत्न बताने वाले कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा दोनों के फैसले से आहत हैं। उन्होंने कहा कि दोनों का कांग्रेस से मोहभंग हो रहा था, आभास होने पर समझाया था, मेरे मना करने के बाद भी दोनों भाजपा में चले गए। इससे पहले तन्खा ने 15 जनवरी 2024 को इन दोनों के साथ खूबसूरत तस्वीर शेयर कर पोस्ट में मेरे दो अनमोल रत्न लिखा था। तन्खा ने जारी बयान में यह भी कहा कि वे और कमलनाथ कहीं नहीं जाने वाले, कोरी अफवाहों पर लोग ध्यान नहीं दें। कांग्रेस में हैं और रहेंगे, लोकसभा चुनाव में मजबूती से लड़ेंगे।
कार्यकर्ता लगा रहे नेताओं के घर के फेरे
जिला पंचायत के तीन सदस्यों, महापौर और पूर्व महाधिवक्ता के कांग्रेस छोड़ भोपाल में जाने के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। अब दूसरे नेताओं पर नजर रखी जा रही है। कुछ कार्यकर्ता जबलपुर से बाहर गए नेताओं के घर के फेरे लगाकर कुशलक्षेम पता लगा रही है। कार्यकर्ताओं को आशंका है कि कुछ पार्षदों को तोडऩे की कोशिश की जा सकती है, इसलिए बुधवार को पार्टी के प्रति निष्ठा के बयान जारी करवाए गए थे।
दल बदल कानून नहीं, इसलिए अयाराम-गयाराम
स्थानीय निकायों में दल बदल कानून लागू नहीं होने के कारण दलीय निष्ठा तार-तार हो रही है। जबलपुर में 2022 के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के दौरान कांग्रेस के एक सदस्य ने क्रास वोटिंग की थी, इससे भाजपा अध्यक्ष पद पर जीत गई थी। हाल ही में तीन सदस्य कांग्रेस छोड़ भाजपा में चले गए हैं। जबलपुर महापौर अन्नू और डिंडौरी के जिला पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने भी पार्टी छोड़ दी है। यह सभी दल बदलने के बाद भी पांच साल तक अपने पद बने रहेंगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता पीजी नाजपाण्डे ने कहा कि यह स्थानीय व नगरीय निकायों की विडम्बना है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दल बदल कानून नहीं तैयार किया गया है, इसलिए कोई कभी भी पार्टी बदल ले रहा है। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा की तर्ज पर स्थानीय निकायों के लिए यह व्यवस्था लागू होनी चाहिए। अगर कोई पार्टी छोड़ता है तो पद भी छोड़े और उसकी जगह नए सिरे से चुनाव कराए जाएं। नाजपाण्डे ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार को कई बार इस ओर ध्यान दिलाया गया, लेकिन अफसोस कानून नहीं बन पाया।
Published on:
09 Feb 2024 10:24 am
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