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खूब शेयर हो रहा दोस्तों का ये वीडियो, आप भी देखें

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Friendship Day 2018

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जबलपुर। स्कूल में जैसे मस्ती होती थी, ठीक वैसे ही मस्ती भरे पल पच्चीस साल बाद एक बार फिर एंजॉय किए। यह नजारा शनिवार को क्राइस्ट चर्च बॉयज स्कूल के 1993 बैच के सिल्वर जुबली रीयूनियन प्रोग्राम में देखने मिला।
होटल नर्मदा जैक्सन में आयोजित कार्यक्रम में 100 से ज्यादा छात्र, जो अब देश-विदेश में विभिन स्तर पर सफल जीवन जी रहे हैं, सम्मलित हुए। इस सम्मेलन में देश के हर कोने के साथ-साथ यूरोप, अफ्रीका से भी दोस्त आए। पिछले पांच दशकों के क्राइस्ट चर्च स्कूल के शिक्षकों को सम्मानित किया गया। आयोजन प्रिंसिपल एलएम साठे एवं मैनेजर सुरेश जैकब भी शामिल हुए। डिजिटल एंथम, डिजिटल स्मारिका, डिजिटल फ्लैशबैक मूवी का डिस्प्ले किया गया।

शिक्षक एमपी शर्मा, नीरज डेविड, निर्मल तिवारी, प्रभा मिश्रा, छाया सिंह, डॉ. उमेश गुलाटी सहित 35 शिक्षकों का सम्मान किया गया। शहर के विकास में योगदान देने वाले राहुल होलानी, पीयूष दीक्षित, रोहित पटेरिया, रोहित बुधराजा, विवेक अग्रवाल, प्रदीप रामचंदानी, गिरीश सूद, तुषार यादव, एमपी हरिहरन को सम्मानित किया गया। सभी स्टूडेंट्स ने स्कूल का भ्रमण कर अपनी यादें ताजा की। स्कूल में पौधे भी रोपे। इस दौरान अमित वेगड़, रश्मि देवदासन, डॉ. विकेश अग्रवाल, विक्रांत कौशल, हेमंत शाह, कपिल जैन, सरबजीत कल्सी, समर गायकवाड़, डॉ. विशाल कालिया, विवेक अग्रवाल उपस्थित रहे।

इंज्युरी के बाद भी जीते मेडल
इंदौर से आए विनय डेरिया अपने दोस्तों बीच एक उदाहरण बने। स्कूल टाइम में वह एथलीट रहे और कई मेडल जीते, लेकिन स्पाइन इंजरी के बाद शरीर में पैरालीसिस अटैक आ गया था। इस वजह से वह दौडऩे में असमर्थ हो गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अब वे स्ट्रेंथ लिफ्टिंग में नेशनल लेवल पर नाम कमा रहे हैं। उन्होंने गोल्ड मेडल और सिल्वर मेडल भी जीते हैं। इसकी खुशी जबलपुर आकर अपने मित्रों के साथ बांटी।

नाइजीरिया से आए दोस्तों से मिलने
प्रदीप नायर ने बताया कि स्कूल और कॉलेज एजुकेशन कंप्लीट होने के बाद नाइजीरिया शिफ्ट हो गए। होम एप्लायंसेज कंपनी में कार्यरत हैं। प्रदीप ने बताया कि जैसे ही स्कूल के लिए रीयूनियन का इनविटेशन मिला तो वह तुरंत चले आए। उनका कहना है कि स्कूल की यादें उन्हें ताउम्र याद रहेंगी और विदेश में रहकर भी जबलपुर को कभी नहीं भूल पाते, इसीलिए मौका मिलते ही वे अपने दोस्तों से मिलने आ गए।

खुद की लिखी किताब दी दोस्तों को
मुंबई में रह रहे जेफरी जॉन थॉमस भी रीयूनियन का हिस्सा बने। इस खास मौके पर उन्होंने खुद की लिखी किताब द फोर कॉर्नर ऑफ इंडिया दोस्तों को दी। उन्होंने बताया कि स्कूल टाइम से ही सोचा था कि पूरा देश घूमने के बाद एक किताब लिखेंगे और उन्होंने इसे पूरा भी किया। अपनी इस जर्नी में उन्होंने पूरे 25 लाख रुपए लगा दिए। पूरा भारत घुमा पर अंत में किताब लिखी।

10 साल बाद आया अपने शहर
स्पेन में रह रहे जसमीत कोहली ने बताया कि वह पूरे 10 साल बाद जबलपुर आए हैं। यह उनके लिए बेहद अनोखा पल है, जब सालों बाद अपने दोस्तों से मिल रहे हैं। जसमीत ने बताया कि स्पेन की लौरा से उन्होंने शादी कर ली थी। इसके बाद जबलपुर आना बहुत कम हो गया, क्योंकि वे एक कंपनी में सीइओ के पद पर हैं। जब रीयूनियन का पता चला तो वह सब काम छोड़ कर यहां चले आए।