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भूलने की बीमारी पूरी तरह भगा देगा यह आसान उपाय

फिजिकल एक्टिविटी दिमाग के साथ-साथ शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है। इससे हमारी याददाशत तेज होती है।

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Health Tips: Amnesia home treatment in jabalpur

Health Tips: Amnesia home treatment in jabalpur

जबलपुर. कहीं आप कुछ समय के लिए कुछ भूल तो नहीं जाते। एक दिन पहले आपके साथ जो हुआ, आपने जो कुछ भी किया, उसके बारे में कुछ याद रहता है। जेब में चाबी या मोबाइल है, लेकिन उसे पूरे घर में ढूंढ़ते तो नहीं। यह प्रॉब्लम अभी तक सीनियर सिटीजन में देखने को मिलती थी। लेकिन आज बदलती लाइफ स्टाइल ने यंगस्टर्स को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया है। शहर के न्यूरो फिजीशियन के अनुसार यह शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस डेमेंशिया और अल्जाइमर होने के शुरूआती लक्षण हो सकते हैं।


फिजिकल एक्टिविटी दिमाग के साथ-साथ शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है। इससे हमारी याददाशत तेज होती है। रोज टहलने जाएं। इससे शरीर ठीक तरह से काम करता है। अगर आपके पास पर्याप्त समय नहीं है, तो आप अपने काम के दौरान थोड़ा समय निकालकर १० से २० मिनट तक एरोबिक या डांस करें।


मानसिक रूप से रहें सक्रिय : इससे बचने के लिए शारीरिक क्रिया जरूरी है। इससे दिमाग सक्रिय रहता है और मेमोरी लॉस होने से रोकता है। तंत्रिकाओं को एक्टिव रखने के लिए चैस, सुडोकू और पजल आदि गेम्स खेलें।
खुद को व्यस्त रखें : खुद को काम में लगाकर रखें। अपने पसंदीदा काम में व्यस्त रहें। ज्यादा से ज्यादा किताबें पढें। बुक्स रीडिंग को अपनी हैबिट में शामिल करें, लेकिन सोशल मीडिया का कम इस्तेमाल करें।


पौष्टिक भोजन लें
शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस की समस्या से बचना चाहते हैं, तो पौष्टिक डाइट का सेवन करें। यह शरीर और दिमाग के लिए अच्छी होती है। फलों का सेवन जरूर करें। दूध पीएं। अल्कोहल, धूम्रपान से बचें। इन सभी आदतों से माइंड डायवर्ड और मेमारी लॉस को बढ़ावा मिलता है।


एक्सपर्ट व्यू
शहर के एक न्यूरो फिजीशियन के अनुसार हद से ज्यादा तनाव में रहने के कारण भूलने की समस्या आती है। शुरुआती जांच और दिनचर्या में बदलाव लाकर इस समस्या से बचा जा सकता है। इनके कारण डायबिटीज, बीपी, शुगर और थायराइड जैसी बीमारी हो सकती है। ऐसी समस्या ६० साल के लोगों में ज्यादा होती है। रोज १० से १५ पेशेंट आते हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस युवाओं में भी देखा जा रहा है।


भरपूर नींद लें
विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी नींद दिमाग को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती है। जब हम सो रहे होते हैं, तब हमारा शरीर लिवर के माध्यम से कोशिकाओं को दोबारा बनाता है और शरीर में बढ़ते रक्तको साफ करता है। विशेषज्ञों के अनुसार किशोरों को कम से कम 8 से १० घंटे की नींद लेनी चाहिए। वयस्कों को प्रतिदिन 7 से 9 घंटे सोना चाहिए, तभी आपका मस्तिष्क स्वस्थ रहेगा।