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लौटेगा ब्रिटिश कालीन रायल होटल का जलवा, हेरिटेज में हुआ शामिल

इस शाही होटल में जा सकते हैं कुत्ते, भारतीयों को प्रवेश नहीं, आजादी के 70 साल बाद सरकार ने लिया ये फैसला

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heritage hotels of india

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जबलपुर। अंग्रेज शासकों द्वारा किस तरह से भारतीयों के साथ उनके ही देश में भेदभाव किया जाता था, इसका जीवंत उदाहरण यहां का रॉयल होटल है। जो वर्तमान में खंडहर जरूर हो चुका है, लेकिन उसकी भव्यता और शाही अंदाज आज भी लोगों को आकर्षित करती है।


राजा ने नातिन को दहेज में दी
इतिहासकार राजकुमार गुप्ता ने बताया कि19 शताब्दी की शुरुआत में जबलपुर में राजा गोकुलदास राज किया करते थे। उन्होंने अपनी नातिन को शादी में दहेज देने के लिए सिविल लाइन्स आरटीओ के सामने एक शानदार कोठी बनवाई थी। नातिन के परिजनों ने बाद में इसे रॉयल ग्रुप को बेच दिया।


कोठी को बना दिया होटल, भारतीयों को कर दिया दूर
रॉयल ग्रुप ने मालिकाना हक पाते ही कोठी को आलीशान होटल में बदल दिया। जिसमें केवल ब्रिटिश शासक, यूरोपीयन्स को ही प्रवेश दिया जाता था, यहां तक की गार्ड, वेटर व अन्य नौकर भी विदेशी ही रखे गए और बाहर गेट पर लिख दिया इंडियन नॉट अलाउड । होटल के आस-पास भी भारतीयों फटकने तक नहीं दिया जाता था। जबकि इस बिल्डिंग को भारतीय राजा ने ही बनवाया था।

निर्माण में इंडो-वेस्टर्न व यूरोपीयन शैली
राजा गोकुलदास ने रॉयल होटल का निर्माण इंडो-वेस्टर्न व यूरोपीयन शैली में बनवाया है। इतिहासकारों के अनुसार होटल बनने के बाद अंग्रेजों के आराम के लिए बड़े-बड़े कमरे बनाए गए थे। जिसमें फाईव स्टार होटल जैसी सभी सुविधाएं मौजूद थीं। होटल की बनावट ऐसी है कि कमरों में वातानुकूलित व्यवस्था जैसा अहसास होता था।

और खंडहर हो गया होटल
स्वतंत्रता मिलने के बाद इस रॉयल होटल में बिजली विभाग का दफ्तर शिफ्ट हो गया। कुछ समय बाद यहां एनसीसी की कन्या बटालियन का कार्यालय बनाया गया। लेकिन, देखरेख के अभाव में अब यह महल खंडहर में तब्दील हो चुका है।

रायल होटल संरक्षित घोषित
रॉयल होटल की महत्ता देखते हुए संस्कृति विभाग ने मप्र एंशीएंट मॉन्यूमेंट एण्ड आर्कियोलॉजीकल साईट्स एण्ड रिमेंस एक्ट 1964 के तहत इसे साल 2013 में संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया है। किंतु जिम्मेदारों ने इसकी सुध नहीं है, जिससे यह संरक्षित इमारत मिटती जा रही है।

रॉयल होटल 16 हेरिटेज सम्पत्तियों में शामिल
अब इस रॉयल होटल को 16 हेरिटेज सम्पत्तियों में शामिल किया गया है। पर्यटन विकास निगम ने पहले से मौजूद पांच हेरिटेज सम्पत्तियों में से दो हेरिटेज परिसम्पत्तियां निजी निवेशकों को आवंटित कर दी हैं। इससे विभाग को 8.64 करोड़ रुपए मिले हैं।

रीवा में गोविंदगढ़ फोर्ट और भोपाल के ताजमहल पैलेस की निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद निजी निवेशकों को आवंटित किया जा चुका है। इस वित्तीय वर्ष में राजगढ़ पैलेस दतिया, बेनजीर पैलेस भोपाल और माधवगढ़ फ ोर्ट सतना को हेरिटेज होटल स्थापित किए जाने के लिए निजी निवेशकों को सौंप दिया जाएगा।

हेरिटेज परिसम्पत्तियों का बनेगा बैंक
आगामी वर्षों में निजी निवेशकों के माध्यम से हेरिटेज होटलों के विकास के लिए हेरिटेज परिसम्पत्तियों का बैंक बनाया जाएगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित साधिकार समिति ने इस तरह की 16 हेरिटेज परिसम्पत्तियों को पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने के लिए चिह्नित किया है।

ये भी हैं शामिल
जबलपुर से रॉयल होटल, उज्जैन से कोठी महल, ग्वालियर से मोती महल और गवर्मेंट प्रेस भवन, शिवपुरी से नरवर फोर्ट, श्योपुर से श्योपुर फोर्ट, गुना से बजरंग फ ोर्ट, मुरैना से सबलगढ़ फोर्ट, सागर में राहतगढ़ फ ोर्ट, पन्ना से महेन्द्र भवन, टीकमगढ़ से बल्देवगढ़ फ ोर्ट, धार से लुनेरा की सराय, बड़वानी से कलेक्टर भवन, कटनी से विजयराघवगढ़ फोर्ट, मंडला से रामनगर फ ोर्ट और रीवा से क्योटी फ ोर्ट शामिल हैं।

प्रदेश में पर्यटन के समग्र विकास-प्रोत्साहन, पर्यटन नीति के क्रियान्वयन व निजी निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से गठित मप्र टूरिज्म बोर्ड ने हेरिटेज परिसम्पत्तियां निजी निवेशकों को आवंटित करने की कार्रवाई की जा रही है। जबलपुर के रॉयल होटल को भी हेरिटेज में शामिल किया है।
- सुरेन्द्र पटवा, राज्यमंत्री, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग