
high court judgement order for lawyers strike
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल की ओर से 9 से 14 मई तक आहूत वकीलों की हड़ताल पर गंभीरता दिखाई है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने काउंसिल से कहा है कि किसी भी वकील को पैरवी करने से जबरदस्ती न रोका जाए। 5 अप्रैल को दोपहर बाद फिर से सुनवाई नियत करते हुए बेंच ने 5 अप्रैल को हुई संयुक्त बैठक में शामिल काउंसिल व अन्य अधिवक्ता संघों के पदाधिकारियों के नामों की सूची मांगी है।
यह है मामला
जबलपुर के वकील प्रवीण पांडे ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि स्टेट बार काउंसिल ने हाइकोर्ट में जजों की नियुक्तियों सहित अन्य मांग करते हुए 9 से 14 अप्रैल तक हड़ताल का आह्वान किया है। 29 मार्च को याचिकाकर्ता ने काउंसिल के समक्ष आवंेदन दे कर आमजनता की पीड़ा रखी। लेकिन इस पर सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने हड़ताल स्थगित करने की मांग की।
वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने स्टेट बार काउंसिल का पक्ष रखते हुए बताया कि काउंसिल की 5 अप्रैल अधिवक्ता संघों के साथ संयुक्त बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि यह आह्वान स्वैच्छिक होगा। जिसे पैरवी करने जाना हो, वो जा सकेगा।
दो बार हुई सुनवाई
दोपहर 12.05 मिनट पर कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता नागरथ को बैठक में तय हड़ताल के एजेंडे, शामिल काउंसिल तथा तीनों खंडपीठों के अधिवक्ता संघों के पदाधिकारियों के नामों की सूची पेश करने को कहा। 1 बजे नागरथ ने उक्त निर्देश का पालन करने के लिए समय मांगा। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को तब तक पुलिस सुरक्षा दिए जाने के निर्देश भी दिए। सरकार का पक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता समदर्शी तिवारी ने रखा।
15 लाख मामले होंगे प्रभावित
याचिकाकर्ता ने कहा कि काउंसिल सरकार की एक संवैधानिक संस्था है। लिहाजा उसे इस तरह की हड़ताल बुलाने का अधिकार नहीं है। इसका व्यापक असर होगा और निचली अदालतों में विचाराधीन मामलों सहित कम से कम 15 लाख मुकदमों की सुनवाई प्रभावित होगी। जबकि सुको के मुताबिक वकीलों को हड़ताल पर जाने, बहिष्कार और यहां तक कि सांकेतिक हड़ताल का भी अधिकार नहीं है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्हें याचिका वापस लेने के लिए धमकियां दी जा रही हैं।
Published on:
07 Apr 2018 11:16 am
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
