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मप्र सड़क परिवहन निगम शुरू करने को लेकर हाईकोर्ट ने दिया ये आदेश

सरकार वित्तीय क्षमता पर बसों का संचालन निर्भर

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जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में मप्र सड़क परिवहन निगम को पुन: शुरू करने के मामले में दायर एक याचिका पर शुक्रवार को सुनवाइ हुई। याचिकाकर्ता का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने कहा है कि सरकार परिवहन वाहनों का प्रबंध स्वयं करे या इसके लिए निगम बनाए, यह राज्य की वित्तीय क्षमता पर निर्भर है। सरकार द्वारा किसी उपक्रम को बंद करने के निर्णय के बाद उसे पुन: शुरू करने का निर्देश देना हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय शुक्ला की बेंच ने सपनि को पुन: आरभ करने, न करने को सरकार का नीतिगत निर्णय बताते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

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यह है मामला
आइटीआइ जबलपुर के पूर्व प्राचार्य मदन मोहन शकरगायें ने यह जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि मध्यप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को करीब 20 साल पूर्व विभाग में कुप्रबंधन व भ्रष्टाचार के चलते बंद कर दिया गया था। इसके बाद से राज्य सरकार ने प्रदेश में लोक परिवहन की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की। याचिका में कहा गया कि सरकार ने निगम के लगातार घाटे में चलने का हवाला देकर एेसा किया। जबकि, उक्त घाटा अफसरों की लापरवाही व अनियमितताओं से हुआ।

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कई राज्यों में सफल है व्यवस्था
उन्होंने कहा, महाराष्ट्र, उप्र सहित कई अन्य राज्यों में लोक परिवहन के लिए सरकारी निगम ही संचालित है। जबकि, प्रदेश में लोक परिवहन का निजीकरण कर दिया गया। इससे जनता को परेशानी व नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग रखी कि इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सपनि की बसों का पुन: संचालन शुरू किया जाए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस मसले को राज्य का नीतिगत मामला बताते हुए याचिका निरस्त कर दी।