जब भी देश की आन-बान और शान की बात आई है, तो जबलपुर की धरती पर बने हथियार ही दुश्मन का सीना छलनी करने के काम आए हैं। ओएफके, जीसीएफ, वीएफजे, ग्रे-आयरन फाउंड्री, 506 आर्मी बेस वर्कशॉप जबलपुर की ही शान नहीं, बल्कि पूरे देश की धड़कन हैं...। पाकिस्तान फतह हो या फिर कारगिल का विजय घोष इसकी सुखद यादें यहां की मिट्टी में समाई हुई हैं।
जानें फैक्टरियों की खासियत
हर पग बारूद- भारत के केन्द्र बिन्दु जबलपुर को प्रकृति ने खूबसूरती से नवाजा है। यहां मेहमानों के स्वागत के लिए प्रकृति ने मां की तरह आंचल को सजाकर रखा है, तो दुश्मनों के लिए यह भूमि काल है। देश की आजादी ने जब आंखें नहीं खोली थीं, तब भी यहां बारूदों के ढेर थे। आयुध निर्माणी खमरिया की धरती पर हर पग बारूद है, तो सन् 1904 में बनी गन कैरेज फैक्ट्री के खजाने में ऐसी गनें हैं कि दुश्मनों का कलेजा कांप जाए।
आयुध निर्माणी खमरिया - आयुध निर्माणी खमरिया देश की प्रमुख आयुध निर्माणियों में शुमार है। इसकी स्थापना आजादी से पहले 1942 में की गई थी। तब से लेकर आज तक यह अनवरत उत्पादन कर रही है। फैक्ट्री के 52 से अधिक सेक्शनों में देश की तीनों सेनाओं के लिए बमों का उत्पादन किया जाता है। स्मॉल आम्र्स से लेकर बडे़ बमों की फिलिंग में इसे महारथ हासिल है। जब भी देश का दुश्मन से सामना हुआ है, फैक्ट्री से बड़ी तादाद में रसद गया है।
वीकल फैक्ट्री जबलपुर - देश की सेना को रसद पहुंचाने के साथ सैनिकों को यहां से वहां ले जाने में वीकल फैक्ट्री के बने ट्रकों का बहुतायत उपयोग होता है। फैक्ट्री की स्थापना 1969 की गई थी। फैक्ट्री एक वर्ष में 14 हजार वाहनों तक का उत्पादन सेना के लिए कर चुकी है। फैक्ट्री ने हमसफर बस, त्रिशूल ट्रक, मतंग ट्रक, शक्तिमान, जोंगा, निशानके अलावा रिकवरी वीकल का भी उत्पादन किया था। फैक्ट्री में मुख्य काम सैन्य वाहनों की असेम्बिलिंग करना है।
गन कैरिज फैक्ट्री - देश की सबसे पुरानी आयुध निर्माणियों में गन कैरिज फैक्ट्री भी शामिल है। इसकी स्थापना 1904 में की गई थी। फैक्ट्री ने 1905 में 500 परिवहन वाहन के साथ उत्पादन शुरू किया था। 1909 में कैरिज का उत्पादन शुरू किया। 1947 में स्टीम रोड रोलर, रेलवे के लिए उत्पाद बनाना शुरू किया। 1959 तक यहां शक्तिमान, निशान और जोंगा वाहन का उत्पादन भी हुआ। फिर 1963 से गन के प्रोडक्शन में कदम रखा। इस दौरान यहां पर 40 एमएम,एल-70 और 81 तथा 120 एमएम मोर्टार का उत्पादन शुरू हुआ। फिर इंडियन फील्ड गन, लाइट फील्ड गन और पंप एक्शन गन का निर्माण किया। वर्तमान में यहां पर देश की सबसे बड़ी 155 एमएम स्वदेशी बोफोर्स तोप धनुष प्रोजेक्ट चल रहा है।