घटना की खबर आग की तरह फैली। जबलपुर में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने वाले सिहोरा निवासी रायबहादुर पं विष्णुदत्त शुक्ल ने एक सभा बुलाई। जिसमें माखन लाल चतुर्वेदी, माधव राव सप्रे, पं रविशंकर शुक्ल, घनश्याम सिंह गुप्ता शामिल हुए। सभा में एक निंदा प्रस्ताव पारित किया गया और फिर पं शुक्ल ने रायबहादुर की पदवी लौटने का एलान करते हुए वाइसराय कमेटी से त्याग पत्र दे दिया। उल्लेखनीय है कि राय बहादुर या राव बहादुर ब्रिटिश शासन में दिया जाने वाला एक सम्मान था जो क्षेत्र के जागीरदार और सम्मानीय व्यक्ति को दिया जाता था।