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जलिया वाला बाग: इस देश भक्त ने पल में ठुकरा दी थी रायबहादुर की पदवी

जलिया वाला बाग हत्याकांड विशेष: जबलपुर में हुआ था भारी विरोध, सभा के बाद पं. विष्णुदत्त शुक्ल ने लौटा दी थी रायबहादुर की उपाधि

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Prem Shankar Tiwari

Apr 13, 2016

Jallianwala Bagh massacre

Jallianwala Bagh massacre

रीतेश प्यासी @ जबलपुर। तेरह अप्रैल का दिन हर भारतवाशी के दिल में दर्ज है। वह मंजर शायद ही कभी भूल पाए जब जलिया वाला बाग में गोरों ने न जानें कितने देशभक्तों को गोलियों भून दिया था। इस नरसंहार ने हर भारतवासी को झकझोर कर रख दिया था। दर्द के साथ वह काला दिन आज फिर याद किया जाएगा। भारत मां के सपूतों को श्रद्धा सुमन चढ़ाए जाएंगे। कम ही लोगों को मालूम है कि इस काले दिन का जबलपुर में भी पुरजोर विरोध हुआ था। कभी प्रदेश की सबसे बड़ी तहसील रहे जिले के सिहोरा नगर में तो इंकलाब जिंदाबाद के नारों के बीच लोग सड़क पर उतर आए थे। संस्कारधानी में भी बड़ी सभा हुई और निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। जागीरदार और वाइस राय कमेटी के सदस्य रहे सिहोरा निवासी रायबहादुर पं विष्णु दत्त शुक्ल ने तो अपनी पदवी तक अंग्रेजों को वापस लौटा दी थी।

रोलेट एक्ट का विरोध
इतिहासकार राजकुमार गुप्ता बताते हैं कि ब्रिट्रिश हुकूमत ने भारत में शासन के सुधार के लिए रोलेट एक्ट बनाया था लेकिन इसकी सिफारिश सुधार की बजाए बंदिशे लगाने जैसी थीं। बस इसी के विरोध में देशभर में आंदोलन की आग भड़क उठी थी। रोलेट एक्ट के ही विरोध में 13 अप्रैल 1919 को पंजाब प्रांत के जलियावाला बाग में बैशाखी के दिन एक आम सभा का आयोजन किया गया था। उस वक्त सभा से नाराज ब्रिट्रिश अफसर जनरल डायर ने जलियावाला बाग को चारों तरफ से घेरते हुए सभा में मौजूद लोगों पर गोली चलाने के आदेश दिए थे। इस घटना में एक हजार भारतीयों की मौत हो गई थी, जबकि करीब दो हजार लोग घायल हुए थे।

Jallianwala Bagh massacre

आग की तरह फैली खबर
घटना की खबर आग की तरह फैली। जबलपुर में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने वाले सिहोरा निवासी रायबहादुर पं विष्णुदत्त शुक्ल ने एक सभा बुलाई। जिसमें माखन लाल चतुर्वेदी, माधव राव सप्रे, पं रविशंकर शुक्ल, घनश्याम सिंह गुप्ता शामिल हुए। सभा में एक निंदा प्रस्ताव पारित किया गया और फिर पं शुक्ल ने रायबहादुर की पदवी लौटने का एलान करते हुए वाइसराय कमेटी से त्याग पत्र दे दिया। उल्लेखनीय है कि राय बहादुर या राव बहादुर ब्रिटिश शासन में दिया जाने वाला एक सम्मान था जो क्षेत्र के जागीरदार और सम्मानीय व्यक्ति को दिया जाता था।

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