
lakshmi ji ki aarti anuradha paudwal mp3
जबलपुर. मंगलवार को आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी है. इस दिन महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। महालक्ष्मी व्रत में माता लक्ष्मी के गजलक्ष्मी स्वरूप की पूजा की जाती है। गजलक्ष्मी का चार भुजाधारी स्वरूप है। नाम के मुताबिक ही यह गज यानी हाथी पर आठ कमल की पत्तियों के समान आकार वाले सिंहासन विराजित होती है। इनके दोनों ओर भी हाथी खड़े होते हैं। चार हाथों में कमल का फूल, अमृत कलश, बेल और शंख होता हैं। पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि इनकी उपासना संपत्ति और संतान देने वाली मानी गई है। निराहार व्रत रहकर जो महिलाएं कठिन तपस्या करेंगी, उन्हें इसका फल जरूर मिलेगा। हाथी पर विराजमान महालक्ष्मी की स्तुति आराधना कर संतान के कल्याण एवं समृद्धि की कामना की जाती है।
गौरतलब है कि गज यानि हाथी को वर्षा करने वाले मेघों तथा उर्वरता का भी प्रतीक माना जाता है। गज की सवारी करने के कारण यह उर्वरता तथा समृद्धि की देवी भी हैं। गज लक्ष्मी देवी को राजलक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है । इन्हें यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इन्हीं की कृपा से राजाओं को धन वैभव और समृद्घि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ज्योतिर्विद जनार्दन शुक्ला ने बताया आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी को महालक्ष्मी पूजन का बहुत महत्व हैं। महिलाएं एक दिन निराहार व्रत रहकर सायंकल देवी लक्ष्मी का पूजा करती हैं। सायंकाल 16 दीप जलाकर वे 16 गठान का धागा बांधती हैं एवं सुनो सुनो लक्ष्मी महारानी सोलह बोल की एक कहानी... मंत्र को 16 बार पढकऱ पूजन करती हैं।
जरूर करें मंत्र जाप
शाम को विधिविधान से माता महालक्ष्मी की पूजा करें। आरती करें, प्रसाद वितरित करें। फिर महालक्ष्मीजी के सरल मंत्र का जाप करें। यह मंत्र है-
महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्वरी, हरिप्रिय नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दयानिधि
इस मंत्र का पूरी श्रद्धा से कम से कम एक माला जाप - 108 जाप करें। हो सके तो रोज यह मंत्र जाप करें। आपके जीवन से धन की कमी हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।

Published on:
02 Oct 2018 10:16 am
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