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जबलपुर। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी व्रत किया जाता है। इसे हाथी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी के गजलक्ष्मी - इस दिन लक्ष्मीजी के गजलक्ष्मी स्वरूप (हाथी-स्वरूप) की पूजा की जाती है। शास्त्रों में महालक्ष्मी के आठ स्वरूपों का वर्णन किया गया है। इस बार गज महालक्ष्मी व्रत 2 अक्टूबर 2018 को है।
यहां नहीं रहती लक्ष्मी
लक्ष्मीजी की पूजा विधिविधान से करनी चाहिए। लक्ष्मीजी कहां रहती हैं और कहां नहीं रहतीं- शास्त्रों में कुछ ऐसे लक्षणों का भी उल्लेख किया गया है। वायु पुराण में बताया गया है कि बिना स्नान किए तुलसी के पत्ते तोड़ कर देवताओं की पूजा करनेवालों से धन की देवी मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं। इसलिए स्नान करने के बाद ही तुलसी के पत्ते पूजन या अन्य किसी काम के लिए तोडऩे चाहिए। गुरु का अपमान करने वाले और गुरु-पत्नी पर बुरी नजर रखने वाले से भी लक्ष्मीजी रूठ जाती हैं। बुरे चरित्र वाले व्यक्तियों के घर भी मां लक्ष्मी निवास नहीं करतीं। गंदगी में देवताओं का पूजन करनेवालों का घर लक्ष्मीजी तुरंत छोड़ देती हैं। बुरे स्वभाव वाली स्त्रियोंं, पर पुरुषों के बारे में सोचनेवाली महिलाओं से भी मां लक्ष्मी कभी प्रसन्न नहीं होतीं। आलसी लोगों से भी लक्ष्मी रूठी रहती हैं। शास्त्रों के अऩुसार जो व्यक्ति घर के सदस्यों में अकारण भेदभाव करता हो, उससे भी मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं। जो व्यक्ति दिन में सोता है, उसके घर भी लक्ष्मी नहीं जातीं। शास्त्रों द्वारा वर्जित दिनों में या शाम के समय स्त्री के साथ सहवास करनेवाले लोगों के घर भी लक्ष्मी छोड़ देती हैं।
बिना दातुन किए, बिना नहाए या गंदे वस्त्र पहनकर पूजा नहीं करनी चाहिए अन्यथा माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। देवताओं के लिए घी का दीपक जलाने के लिए रूई की सफेद बत्ती उपयोग करनेवालों पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।सरसों के तेल का दीपक जलाने के लिए लाल बत्ती का उपयोग करने पर भी लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं।
Published on:
28 Sept 2018 03:43 pm
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