
medical colleges : मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन (government medical colleges) के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में नीट क्वालिफाई करने वाले छात्रों को काउंसलिंग के लिए कुछ नियमों का ध्यान रखना होगा। जैसे अगर उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिल जाती है तो उनके लिए प्रवेश लेना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर वे प्रवेश प्रक्रिया से स्वत: ही बाहर हो जाएंगे। वे दस्तावेज सत्यापन कराने के साथ ही एडमिशन लेकर भी काउंसलिंग प्रक्रिया में बने रह सकते हैं।
सिवनी, मंदसौर व नीमच में शुरू किए गए तीन नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट बढ़ाए जाने को लेकर प्रयास शुरू हो गए हैं। तीनों मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस की 50-50 सीट और आवंटित कराने चर्चा जारी है। अगर ऐसा होता है तो एमबीबीएस की 150 सीट और बढ़ जाएंगी। यानी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 150 और छात्रों को एडमिशन मिल सकेगा। वर्तमान में इन मेडिकल कॉलेजों के पास 50-50 सीट ही हैं।
● एडमिशन प्रोफाइल
● आवंटन पत्र
● एनटीए का एडमिट कार्ड
● रैंक लेटर
● 10 वीं व 12 वीं की अंक सूची
● ट्रांसफर सर्टिफिकेट
● चरित्र प्रमाण पत्र,
● पात्र होने पर विकलांग व इडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट
● रुरल सर्विस बांड●
● डिसकंटीन्यूएशन बांड शपथ पत्र
● मेडिकल फिटनेस,
● सेल्फ अटेस्टेड आधार कार्ड या अन्य आईडी
● अगर नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में किसी छात्र को सीट आवंटित हुई तो उसे एडमिशन लेना होगा फिर अगर उसे एस में एडमिशन का अवसर मिलता है तो फीस यहां से एस के लिए ट्रांसफर हो जाएगी।
● किसी छात्र के कुछ नंबर से चूकने पर उसे निजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलता है तो अपग्रेडेशन राउंड में उसे सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल सकता है। वह दूसरे राउंड की काउंसलिंग में भी शामिल हो सकता है।
मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अगर किसी छात्र को सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिलती है तो उस पर प्रवेश अनिवार्य होगा हालाकि अपग्रेड के लिए अप्लाई कर सकते हैं। अपग्रेड होने पर फीस संबंधित मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर हो जाएगी।
डॉ. पुष्पराज बघेल, रजिस्ट्रार मेडिकल यूनिवर्सिटी
Updated on:
27 Aug 2024 12:48 pm
Published on:
27 Aug 2024 12:45 pm
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