
High Court cancels attachment order of employee in MP
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जबरिया सेवानिवृत्ति पर कड़े तेवर दिखाए हैं। मप्र राज्य उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन अशोक तिवारी की जबरिया सेवानिवृत्ति के मामले में हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए सरकार के निर्णय पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने नोटिस जारी कर सरकार से जवाब भी मांगा है। जबलपुर Jabalpur हाईकोर्ट ने अशोक तिवारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद आगामी आदेश तक उनके आयोग के चेयरमैन के पद पर बने रहने की बात कही। अशोक तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट और मुंबई हाईकोर्ट के न्याय दृष्टांत के आधार पर उन्हें 65 साल में हटाने के सरकार के फैसले को गलत बताया था।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक ने राज्य उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन अशोक तिवारी को आयोग का अध्यक्ष बनाए रखने का आदेश देते हुए उनकी जबरन सेवानिवृत्ति पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है। इस केस की अगली सुनवाई जनवरी में रखी गई है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक की एकलपीठ ने राज्य उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन अशोक तिवारी की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्हें गलत तरीके से हटाया गया, सरकार के इस फैसले को उन्होंने असंवैधानिक बताया। न्यायालय ने सुनवाई के बाद अशोक तिवारी की जबरिया सेवानिवृत्ति पर रोक लगा दी। एकलपीठ ने आगामी आदेश तक अशोक तिवारी को ही आयोग के चेयरमैन के पद पर बरकरार रखने के निर्देश दिए। उनके स्थान पर श्रीकांत पांडे को प्रभारी बनाने के आदेश पर भी रोक लगाई। मामले में राज्य सरकार और अन्य अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अशोक तिवारी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट और मुंबई हाईकोर्ट के न्याय दृष्टांत के आधार पर बताया कि आयोग के चेयरमैन और सदस्यों का कार्यकाल 67 साल होना चाहिए जबकि उन्हें 65 साल में ही सेवानिवृत्त कर दिया गया। याचिका में यह भी कहा गया कि उनके स्थान पर एक कनिष्ठ अधिकारी को आयोग का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
Updated on:
07 Dec 2024 03:43 pm
Published on:
07 Dec 2024 03:20 pm
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