
Nirmal Baba is out of criminal case
जबलपुर। निर्मलजीत सिंह नरूला उर्फ निर्मल बाबा पर अंतत: हाईकोर्ट की कृपा बरस गई। उनके खिलाफ सागर जिले के बीना में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत में लंबित आपराधिक मुकदमा वापस ले लिया गया है। दोनों पक्षों के अदालत से बाहर हुए समझौते के आधार पर निचली अदालत ने यह प्रकरण खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन की सिंगल बेंच ने निर्मल बाबा की ओर से दिए गए इस आशय के शपथपत्र पर उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी । निचली अदालत में दायर इस प्रकरण को याचिका में चुनौती दी गई थी।
लकवाग्रस्त पिता को नहीं लगा था आराम
सागर जिले के आचवल वार्ड बीना के निवासी सुरिंदर ने बीना प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत मेंं २०१२ में एक परिवाद दायर किया था। इसमें कहा गया था कि नई दिल्ली के नेहरू प्लेस निवासी निर्मलजीत सिंह नरूला उर्फ निर्मल बाबा भ्रामक विज्ञापनों के जरिए लोगों को अंधविश्वास का शिकार बना रहे हैं। इन्हीं विज्ञापनों के जाल में फंस कर वे अपने लकवाग्रस्त पिता को निर्मल बाबा के तथाकथित दरबार ले कर गया, लेकिन उन्हें कोई आराम नहीं मिला।
अंधविश्वास फैलाने का लगाया आरोप
सुरिंदर ने आरोप लगाया कि विभिन्न माध्यमों में प्रसारित होने वाले इन विज्ञापनों के जरिए लोगों को तरह-तरह के ढोंग-ढकोसलों के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसी को काला पर्स रखने के लिए, किसी को दस-दस के नये नोटों की गड्डी रखने के लिए तो किसी-किसी को लोहा छूने तक से मना किया जा रहा है। ईश्वर की कृपा रुकने का डर बता कर लोगों को इससे बचने के लिए बाबा की शरण लेने को प्रेरित किया जा रहा है।
समझौते पर याचिका खारिज
पिता को आराम नहीं लगने और बाबा के दावों पर आपत्ति जताते हुए सुरिंदर ने बीना थाने में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस परिवाद पर १ जून २०१२ को संज्ञान लेते हुए जेएमएफसी आरके देवलिया की अदालत ने निर्मल बाबा के खिलाफ नोटिस जारी किए थे। इस आदेश को याचिका में चुनौती दी गई थी। बुधवार को हाईकोर्ट को याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इस मामले में शिकायतकर्ता व निर्मल बाबा का समझौता हो चुका है। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
Published on:
17 Aug 2017 11:16 am
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