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प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं को पुलिस ने बाल पकड़कर खींचा, अब डीजीपी देंगे कोर्ट को जवाब

राज्य सरकार, डीजीपी और भोपाल एसपी से हाईकोर्ट ने पूछा- पुरुष आरक्षकों ने क्यों की बदसलूकी  

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दो साल पहले अपह्त मां-बेटे को पुलिस ने बरामद किया

जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने मेडिकल छात्राओं द्वारा मुख्यमंत्री निवास के सामने अपनी मांगों को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी के मसले पर संजीदगी दिखाई है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए डीपीजी व भोपाल एसपी से 4 सप्ताह में मामले पर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई ५ मार्च को होगी। याचिका के साथ पत्रिका में प्रकाशित समाचार व चित्र की प्रति संलग्न की गई है।

बाल खींचा
व्यापमं मामले के व्हिसिल ब्लोअर इंदौर निवासी आनंद राय की ओर से यह याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता आदित्य संघी ने याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया कि 19 जनवरी को भोपाल के आरकेडीएफ कॉलेज की 60 -70 छात्राएं अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री निवास के सामने प्रदर्शन कर रहीं थीं। सभी छात्राएं १७-२० वर्ष की हैं। उनका प्रदर्शन नियंत्रित करने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को तैनात नहीं किया गया था। नियंत्रित करने के नाम पर पुलिस आरक्षकों ने इन छात्राओं के बाल पकड़कर खींचे। इसके अलावा छात्राओं को पुरुष आरक्षकों ने स्पर्श भी किया। उन्होंने बताया कि दंड प्रक्रिया संहिता के तहत किसी भी महिला को हाथ लगाने का अधिकार सिर्फ महिला आरक्षक को है।

पुलिस अफसरों की जानकारी में हुआ
इसके बावजूद अधिकारियों की मौजूदगी में पुरूष आरक्षकों ने नाबालिग-बालिग छात्राओं से बदसलूकी की। बिना अधिकार उन्हें टच कर छात्राओं की मर्यादा का उल्लंघन किया गया। उन्होंने दैनिक पत्रिका भोपाल के २० जनवरी के अंक में प्रकाशित समाचार की प्रति कोर्ट के पटल पर रखी। उन्होंने कहा कि प्रकाशित समाचार और चित्र इस बात को साबित करते हैं। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता को प्रमुख सचिव गृहविभाग, डीजीपी और भोपाल पुलिस अधीक्षक से 4 सप्ताह के अंदर निर्देश लेकर जवाब पेश करने को कहा।