
Rani Durgavati University's 62nd Foundation Day
जबलपुर. एक ओर राजभवन अधिक से अधिक छात्रों को विश्वविद्यालय से जोडऩे के लिए विभागों में तकनीकी व्यवस्थाएं बढ़ाने पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर रानी दुर्गावती विवि के मैथमेटिक्स विभाग की विवि प्रशासन अनदेखी कर रहा है। यहां लैब के नाम पर कम्प्यूटर सिस्टम बंद पड़े हैं। छात्रों से कह दिया जाता है कि प्रैक्टिकल करना है, तो अपना लैपटॉप लेकर आओ। मैथमेटिक्स डिपार्टमेंट को मॉडल डिपार्टमेंट बनाने की योजना मूर्तरूप नहीं ले सकी है।
हाई लेवल प्रेक्टिकल सम्भव नहीं
लैब के नाम पर रखे चंद कम्प्यूटर हाई लेवल प्रैक्टिकल करने में सक्षम नहीं हैं। ये 15 से 20 साल पुराने हैं। उनमें न तो पर्याप्त क्षमता की रैम है न आधुनिक सॉफ्टवेयर हैं। छात्रों को प्रैक्टिकल नॉलेज की जगह थ्योरिटीकल कक्षाओं पर जोर दिया जा रहा है। कम्प्यूटर आधारित 90 प्रैक्टिकल छात्रों को करने होते हैं। कम्प्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के लिए नई तकनीक पर आधारित 10 कम्प्यूटर खरीदने के लिए लगभग 10 पत्र इंजीनियरिंग विभाग को भेजे जा चुके हैं। हर बार तकनीकी कमियां बताकर फाइल लौटा दी गई। सूत्रों की मानें तो कम्प्यूटर साइंस डिपार्टमेंट सेल्फ फाइनेंस है, लिहाजा कमीशनबाजी की गुंजाइश न होने से कम्प्यूटर साइंस और मैथमेटिक्स डिपार्टमेंट में खरीदी को लेकर विभाग की ओर से रुचि नहीं ली जा रही।
टूटी सीलिंग, फंगस के साथ काली पड़ी
कम्प्यूटर लैब की सीलिंग की पीओपी निकल चुकी है। फंगस लगने से सीलिंग काली पड़ गई है। दुर्गंध के कारण बैठना सम्भव नहीं है। पानी टपकने से उपकरण भी खराब हो गए हैं।
कभी बढ़ानी पड़ी थीं सीटें
एक समय ऐसा था जब इस डिपार्टमेंट में प्रवेश को लेकर छात्रों की लाइन लगती थी। वर्ष 2012-13 में विभाग प्रमुख ने 10 सीटें बढ़ाई थीं। सीटें 40 की गई और 39 पर एडमिशन हुए। 2014-15 के बाद विभाग पर ध्यान न देने के कारण छात्रों की संख्या 20 पर आ गई है।
68 हजार का विवाद
बताया जाता है कि मैथमेटिक्स एवं कम्प्यूटर साइंस विभाग के लिए भवन निर्माण के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर यूजीसी को भेजना था। स्वाइल टेस्ट की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग विभाग को दी गई। इंजीनियरिंग विभाग ने रिपोर्ट के लिए 68 हजार रुपए की डिमांड रखी, जिसे विभाग प्रमुख ने नामंजूर कर दिया। इसे लेकर कहा-सुनी हुई। उसके बाद दोनों विभागों के बीच अनबन है।
यह बात सही है कि कम्प्यूटर लैब के लिए उपकरण नहीं हैं। इस सम्बंध में कई बार सम्बंधित विभाग से शिकायत की गई। व्यवस्थाओं के लिए स्वयं की राशि खर्च करनी पड़ रही है।
प्रो. पूर्णिमा जैन, एचओडी
विवि प्रशासन की लापरवाही से विभागों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। रादुविवि रिसर्च स्कॉलर इसका विरोध करेंगे।
अनुज प्रताप सिंह, रिसर्च स्कॉलर अध्यक्ष
Published on:
10 Jul 2018 06:06 am
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