
कोरोना मरीज के इलाज में जुटे डॉक्टर
जबलपुर. कहते हैं कि व्यक्ति की शोहरत और कामयाबी में महिला का हाथ होता है। इसे साबित किया है, एक कोरोना स्पेशलिस्ट की पत्नी ने। बता उन दिनों की है जब देश में कोरोना पांव पसार रहा था। अस्पतालों में Corona patients की बाढ़ सी आ गई थी। इन मरीजों का इलाज करना बेहद कठिन भी था। लेकिन बहुतेरे युवा डॉक्टरों ने अपनी जान जोखिम में डाल कर अपना ध्यान केवल और केवल मरीजों पर केंद्रित किया। इसी दौरान एक युवा डॉक्टर जो मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं की गर्भवती पत्नी ने उन्हें प्रेरित किया। डॉक्टर पति से कहा, आपका कर्म व धर्म दोनों ही मरीजों की सेवा करना है। लिहाजा आप अपने मरीजों पर ध्यान केंद्रित करें। पत्नी की वो प्रेरणा कि डॉक्टर ने फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
ये युवा डॉक्टर और कोई नहीं बल्कि मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर अविनाश जैन हैं। वह मार्च से ही कोरोना ड्यूटी कर रहे हैं। इस दौरान कई बार विपरीत परिस्थितियां भी पैदा हुईं। अचानक कोई मरीज गंभीर हाल में पहुंचा जिसकी जान बचाने के लिए वो मास्क व ग्लब्स पहनकर कोविड वार्ड में चले जाते। यहां तक कि पीपीई किट भी नहीं पहना। इसके पीछे तर्क ये कि जितना वक्त पीपीई किट पहनने में लगेगा उतने में मरीज की जान बचाई जा सकती है। डॉ. जैन का कहना है कि पत्नी के साथ पूरे परिवार ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया। यह सोचकर स्वयं भी सावधानी बरती कि डॉक्टर बीमार हो गए तो मरीजों का उपचार कौन करेगा।
दरअसल गर्भवती पत्नी ने डॉक्टर पति से सिर्फ इतना ही कहा था कि, चिकित्सक का पहला धर्म मरीजों की सेवा करना है। यह बात डॉ जैन को भा गई। इससे बड़ी प्रेरणा और क्या हो सकती है किसी के लिए कि पत्नी, पति के काम को समझे और उसे उसके लिए प्रेरित करे। लिहाजा डॉ. अविनाश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कोरोना पीड़ित मरीजों की सेवा में डटे रहे।
डॉ. जैन की जब कोरोना वार्ड में ड्यूटी लगाई गई तब उनकी पत्नी गर्भवती थीं। 10 दिन पूर्व उन्होंने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है। डॉ. जैन बताते हैं कि ड्यूटी के दौरान स्वयं, सहयोगी स्टाफ व स्वजन को कोरोना के संक्रमण से बचाने की चुनौती थी। ड्यूटी करते हुए वे मास्क व ग्लब्स को गाइड लाइन के हिसाब से इस्तेमाल करते थे, जिसकी वजह से वे संक्रमण से बचे रहे। घर भी जाते तो अलग कमरे में ही रहते। परिवार के लोगों से पूरी तरह से दूरी बना के रखी ताकि वो भी सुरक्षित रहें।
डॉ जैन का कहना है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना संक्रमण का खतरा रोक सकती है। कोरोना संक्रमण काल में उन्होंने खुद की सेहत व खानपान से समझौता नहीं किया। समय-समय पर नाश्ता व भोजन में पौष्टिक आहार लेते रहे ताकि इम्युनिटी बनी रहे। योग व्यायाम को भी लगातार तरजीह दी। मरीजों की सेवा के दौरान भी इसके लिए वक्त निकाला। डॉ. जैन की सलाह है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क व देह की दूरी जरूरी है। आम नागरिकों को टीका आने तक संक्रमण से अपने बचाव में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
Published on:
10 Dec 2020 02:52 pm
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