जबलपुर। रंगजी लिटिल बैले ट्रूप ने डांस ड्रामा प्रस्तुत किया। जिसमें कलाकार कठपुतली बनकर सीता-राम विवाह के बाद, अयोध्या आगमन से रावण वध तक की कथा बताते हैं। मुखौटों से ढके चेहरे, बंधे हुए पंजे, चलने का अंदाज और संगीत के साथ लयबद्धता ने बैले को अद्भुत स्वरूप दिया। शास्त्रीय और लोकनृत्य के सांस्कृतिक संगम को मंच पर बखूबी प्रस्तुत किया गया। इसी बीच मानस भवन में वल्र्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के गढ़ा रामलीला समिति के कलाकारों ने रावण-बाणासुर संवाद की मनमोहक प्रस्तुति दी। रावण की संवाद अदायगी ने दर्शकों को रिझाया तो वहीं राजधर्म के बारे में कही गई बात कि राजा के लिए राष्ट्रहित निजी हित से ऊपर होता है, यही परम राजधर्म है।