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रेयर ऑफ रेयरेस्ट: ‘महिला की गरीबी’ देखकर हाईकोर्ट ने बदला फैसला…

MP News: बेंच ने पुराने आदेश में संशोधन कर बॉण्ड की रकम 70 हजार से घटाकर 10 हजार करने का आदेश दिया।

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फोटो सोर्स: पत्रिका

फोटो सोर्स: पत्रिका

MP News: जेल से एक महिला की रिहाई में गरीबी ऐसे आड़े आई कि 70 हजार का बेल बॉण्ड न भर पाने से साढ़े 5 साल जेल में ही काटने पड़े। मामला जब दूसरी बार हाईकोर्ट में आया तो जस्टिस विवेक अग्रवाल, जस्टिस अवनींद्र सिंह की बेंच ने दुर्लभ से दुर्लभतम केस माना।

बेंच ने पुराने आदेश में संशोधन कर बॉण्ड की रकम 70 हजार से घटाकर 10 हजार करने का आदेश दिया। जबलपुर की महिला पर पति की हत्या का आरोप था। ट्रायल कोर्ट ने 2014 में उम्रकैद की सजा सुनाई। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी तो 2020 में सजा निलंबित कर दी। 70 हजार के निजी मुचलके व निचली कोर्ट के लगाए जुर्माना देने पर जमानत देने के आदेश दिए।

जुर्माने की रकम भर ही जमा कर पाई

दूसरी बार कोर्ट को बताया, महिला ने जुर्माने की राशि जमा की है, पर निजी मुचलका जमा करने में असमर्थ है, इसलिए 8 जनवरी, 2020 के आदेश में संशोधन किया जाए। इस पर हैरान डिवीजन बेंच ने इसे दुर्लभ से दुर्लभतम मामला माना। कोर्ट ने कहा, सजा के निलंबन के दौरान अपीलकर्ता की व्यक्तिगत स्वतंत्रता साढ़े पांच साल से अधिक समय तक खतरे में रही है। निजी मुचलके की राशि घटाकर 10 हजार कर दी।