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सतीश ने शहर के बैंक खाते बंद कर सिलीगुड़ी के एकाउंट से किया बुकियों से लेनदेन, विक्की भी शहर से भाग गया

आइपीएल क्रिकेट सट्टा : गुर्गों और फर्म के नाम पर खुलवाया था खाता चार मई से नई सीरीज की तैयारियों में जुटे बुकी  

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जबलपुर. दुबई में बैठकर शहर समेत कई देशों में क्रिकेट का सट्टा संचालित करने वाले सटोरिए सतीश सनपाल और उसके गुर्गे फूटाताल निवासी आजम, दिलीप खत्री, संजय खत्री, मुरली खत्री, आकाश गोगा, अजीत गोगा, इंद्रजीत सिंह समेत अन्य के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की तो उसने शहर के बुकियों से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित एक बैंक के माध्यम से लेनदेन किया। पुलिस को चकमा देने के लिए सतीश ने पहले ही सिलीगुड़ी के एक बैंक में एकाउंट खुलवाया था। पुलिस को उसके शहर के बैंक एकाउंट्स की जानकारी मिली तो उसने सिलीगुड़ी के बैंक एकाउंट का उपयोग करना शुरू कर दिया था। यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस इस बैंक एकाउंट की जानकारी जुटा रही है।

पुलिस कार्रवाई के बाद बुकियों ने शहर में चलने वाले क्रिकेट सट्टे की सभी लाइनें बंद कर दी थीं। अब वे नई क्रिकेट लीग और मैचों में सट्टे की लाइन शुरू करने की कवायद में जुअ गए हैं। जानकारी के अनुसार चार जून से जिम्बॉब्वे और अफगानिस्तान के बीच वनडे क्रिकेट सीरीज शुरू हो रही है। इसके लिए बुकियों ने सट्टा खेलने वालों से सम्पर्क करना शुरू कर दिया। उनका मानना है कि आइपीएल के बाद पुलिस क्रिकेट सट्टै से ध्यान हटा लेगी। जानकारी यह भी है कि कई बुकियों ने शहर व आसपास के होटलों और फार्म हाउस किराए पर लेने की बात भी की है।

फोन बंद, साथियों-परिजनों पर नजर

पुलिस की एक टीम सतीश के खास राहुल चन्ना और सोनू शिवहरे समेत अन्य को तलाश रही है। पुलिस टीम ने राहुल और सोनू के मोबाइल की कॉल रिकॉर्ड डिटेल्स की भी जांच की, लेकिन उनकी लोकेशन नहीं मिली। पुलिस की मानें तो सतीश से जुड़े सभी बुकी अपने मोबाइल बंद कर दूसरे नम्बरों का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि पुलिस उन सभी बुकियों के परिजन के फोन पर नजरें जमाए हुए है। पुलिस के अनुसार यदि बुकी अपने परिजन से सम्पर्क करते हैं तो उनके पास आने वाले नए नम्बरों के आधार पर उन तक पहुंचा जा सकता है।

कई और सटोरियों-बुकियों के शागिर्द

जानकारी के अनुसार जिस दिन पुलिस टीम ने दिलीप खत्री के चावला रेस्टोरेंट में दबिश देकर उसके पिता मुरली और संजय को गिरफ्तार कर रकम जब्त की थी, उस दिन क्राइम ब्रांच के कुछ अधिकारी और जवान वहां खाना खा रहे थे। पुलिस को देखकर वे रफूचक्कर हो गए थे। सूत्रों की मानें तो सतीश और दिलीप के क्राइम ब्रांच समेत जिला पुलिस बल, एसटीएफ, साइबर सेल समेत सभी विंगों में शार्गिद हैं, जो उन्हें सतर्क करने बचाने का काम करते थे। इसके एवज में वे उनसे मोटी रकम ेलेते थे। दिलीप कई जवानों का पूरा खर्च भी उठाता था।

सैलून की आड़ में लेनदेनपुलिस को जांच में पता चला कि दिलीप के क्रिकेट सट्टे में विक्की मनानी भी उसका खास गुर्गा है। वह भी शहर में कई जगहों पर बुक बैठाता था। वह हार-जीत की रकम का लेनदेन सैलून के जरिए करता था। शहर के कई बड़े बुकी भी विक्की के सैलून में देखे गए हैं। मुकेश, रवि और जेपी ने भी ग्वारीघाट थाना क्षेत्र में कई स्थानों पर अपनी बुक बैठाई थी। सतीश और दिलीप पर हुई कार्रवाइयों के बाद विक्की भी शहर से भाग गया है।
कोतवाली पुलिस भी सवालों के घेरे में

आजम ने रिवॉल्वर के लिए आवेदन किया तो कोतवाली पुलिस को उसके कारनामों की जानकारी थी। आजम ने थाने में सेटिंग कर अपना पुलिस वेरीफिकेशन करा लिया और उसे गन लाइसेंस मिल गया। इसके बाद से आजम कोतवाली पुलिस के भी अधिकारियों और जवानों के काफी करीब आ गया था। उसे अक्सर उनके साथ थाना क्षेत्र में देखा जाता था। इसे लेकर कोतवाली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।