
Medical Science University
जबलपुर । नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और सम्बद्धता के घोटाले में मप्र नर्सिंग काउंसिल के साथ ही मप्र मेडिकल यूनिवर्सिटी (एमयू) की भूमिका पर सवालिया निशान लग रहे हैं। नर्सिंग कॉलेजों ने अपने यहां अध्ययनरत छात्रा को शिक्षक बता दिया। एक अन्य कॉलेज ने तीन फैकल्टी के नाम सूची में दो-दो बार दर्शाए। एक शिक्षिका को अलग-अलग माइग्रेशन नम्बर बनाकर दस कॉलेजों में प्राचार्य से लेकर अन्य पदों पर कार्यरत दर्शाया गया।
आरटीआई से मिली जानकारी
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में मान्यता व संबद्धता प्राप्त करने के लिए ग्वालियर के रामकृष्ण कॉलेज ऑ$फ नर्सिंग ने आवेदन में अपने यहां एमएससी की छात्रा अनुराधा कुमारी को शिक्षिका बताकर मान्यता हासिल कर ली। एक अन्य फैकल्टी सावित्री धाकड़ को राम कृष्ण कॉलेज ऑ$फ नर्सिंग के अलावा पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज ऑ$फ नर्सिंग ग्वालियर ने एक ही समय पर स्वयं के कॉलेज में कार्यरत दर्शाकर मान्यता ली। नर्सिंग काउंसिल ने बिना जांच पड़ताल किये मान्यता दे दी और मेडिकल यूनिवर्सिटी ने भी जांच और स्क्रूटनी के नाम पर औपचरिकता कर संबद्धता दे दी।
5 कॉलेजों में प्रिंसिपल , 6 में वाइस प्रिंसिपल एक ही
12 अलग-अलग नर्सिंग कॉलेजों ने लीना नामक महिला को स्वयं के कॉलेजो में प्रिंसिपल , वाइस प्रिंसिपल, प्रोफेसर के रूप में एक ही समय पर कार्यरत प्रदर्शित किया है । इन समस्त संस्थाओं ने एक ही महिला के कई फर्जी पंजीयन क्रमांक बनाकर व दर्ज कर यह फर्जीवाडा किया है। किसी भी नर्सिंग स्टाफ का राज्य में सिर्फ एक ही पंजीयन होना संभव है। फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर बनाकर एक ही फैकल्टी को 10-10 कॉलेजों में कार्यरत दिखाया गया।
मेरी नियुक्ति हाल ही में हुई है। मैं सभी शिकायतों की जांच करूंगा। अनियमितताओं को दूर करने निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करूंगा।
डॉ अशोक खंडेलवाल, कुलपति, मेडिकल यूनिवर्सिटी
Published on:
23 Aug 2022 07:17 pm
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