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जबलपुर। एमपी स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों को अब प्रतिमाह लगभग डेढ़ लाख रुपए तक सैलरी मिलेगी। इसका रास्ता रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय द्वारा यूजीसी के सातवें वेतन आयोग की मंजूरी से खुल गया है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में गुरुवार को एक्जीक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग में सातवें वेतनमान पर चर्चा हुई। सदस्यों ने यूजीसी के नए वेतनमान के अनुसार वेतन लागू करने के विवि के मान्य कर दिया है। इससे प्रोफेसरों का वेतन मौजूद वेतन से लगभग 15-35 हजार रुपए तक बढ़ जाएगा। आरडीवीवी में सातवें वेतनमान की मंजूरी के बाद प्रदेश अन्य राज्य विश्वविद्यालयों में भी सातवां वेतनमान जल्द लागू किए जाना लगभग तक हो गया है।
एक हजार कर्मचारियों को फायदा
आरडीवीवी की एक्जीक्यूटिव काउंसिल द्वारा सातवें वेतनमान को मान्य किए जाने से विवि के करीब एक हजार अधिकारी, अध्यापक और कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। इनकी मौजूदा सैलरी में प्रतिमाह ३५ हजार रुपए तक का फायदा होगा। बैठक में कुलपति डॉ. कपिल देव मिश्र, कुलसचिव डॉ. बी भारती, कार्यपरिषद सदस्य दिलीप यादव, प्रो. शैलेश चौबे, प्रो. वीके साहू, संगीता जोशी, सुशीला मार्को, राधिका मिश्र, उपस्थित थे।
विदाई समारोह पर दोगुनी राशि होगी खर्च
कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवानिवृत्ति पर अब तक कर्मचारी संघ द्वारा समारोह किया जाता था, जिसके लिए विवि की ओर से ढाई हजार रुपए दिए जाते थे, अब विवि ने इसकी राशि 5 हजार कर दी है। समारोह का आयोजन भी विवि ही करेगा।
रिवाइज्ड पे-स्केल जारी
यूजीसी ने सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए रिवाइज्ड पे-स्केल का अध्यादेश जारी कर दिया है। इस नए पे-स्केल से 6000 एकेडेमिक ग्रेड पे-एजीपी पर नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर का वेतन 57 हजार 700 रुपए होगा। 10 हजार एजीपी वाले प्रोफेसर का वेतन 1 लाख 30 हजार रुपए से बढ़कर 1 लाख 44 हजार रुपए प्रतिमाह होगा। इस नए अध्यादेश के मुताबिक बढ़े वेतनमान भार यूजीसी तीन वर्ष तक संबंधित संस्थान को 50 प्रतिशत तक अनुदान राशि देगी।
Published on:
03 Nov 2017 01:47 pm
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