
shani dev ko kaise khush kare in hindi
जबलपुर। 15 मई को जेठ माह की अमावस्या है। ज्येष्ठ अमावस्या के इस दिन शनि जयंती भी मनाई जाएगी। इस दिन शनि देव की विशेष पूजा का विधान है। शनि हिंदू ज्योतिष में नौ मुख्य ग्रहों में से एक है। शनि अन्य ग्रहों की तुलना मेें धीमे चलते हैं, इसलिए इन्हें शनैश्चर-धीरे-धीरे चलनेवाले- भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं में शनि के जन्म के विषय में काफ ी कुछ बताया गया है और ज्योतिष में शनि के प्रभाव का साफ संकेत मिलता है। शनि ग्रह, वायु तत्व और पश्चिम दिशा के स्वामी हैं।
शनि जन्म कथा: शनि जन्म के संदर्भ में एक पौराणिक कथा बहुत मान्य है, जिसके अनुसार शनि, सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। सूर्य देव का विवाह प्रजापति दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ था। कुछ समय पश्चात उन्हें तीन संतानों के रूप में मनु, यम और यमुना की प्राप्ति हुई। इस प्रकार कुछ समय तो संज्ञा ने सूर्य के साथ निर्वाह किया परंतु वह सूर्य के तेज को अधिक समय तक सहन नहीं कर पाईं। उनके लिए सूर्य का तेज सहन कर पाना मुश्किल होता जा रहा था। इसी वजह से संज्ञा अपनी छाया को पति सूर्य की सेवा में छोड़ कर वहां से चली गईं। कुछ समय बाद छाया के गर्भ से शनि देव का जन्म हुआ।
शनि जयंती पूजा: शनि जयंती के अवसर पर शनिदेव के निमित्त विधि-विधान से पूजा-पाठ तथा व्रत किया जाता है। शनि जयंती के दिन किया गया दान पुण्य एवं पूजा-पाठ, शनि संबंधी सभी कष्टों दूर कर देने में सहायक होता है। शनिदेव के निमित्त पूजा करने हेतु भक्तों को चाहिए कि वे शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी स्नान आदि से निवृत्त होकर नवग्रहों को नमस्कार करते हुए शनिदेव की लोहे की मूर्ति स्थापित करें और उसे सरसों या तिल के तेल से स्नान करवाएं तथा षोड्शोपचार पूजन करें।
मंत्र जाप सबसे उत्तम
यह तय है कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है। शनिदेव कर्मों के अनुसार फल देते हैं इसलिए उनसे अपने बुरे कर्मों की क्षमा मांगना जरूरी है। इसके लिए शनि जयंती के दिन शनि मंत्र का उच्चारण करते हुए कम से कम एक माला जाप करें। ये मंत्र है - ऊं शं शनिश्चराय नम:। यह सरल मंत्र पूरी श्रद्धा के साथ उच्चारित करें, जितना ज्यादा जाप करेंगे उतना ज्यादा फायदा होगा।
Published on:
14 May 2018 09:10 am
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