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Shashi Kapoor का एमपी से था गहरा जुड़ाव, कलाकारों को सिखाई थी थिएटर की बारीकियां

कपूर खानदान का जबलपुर से जुड़ा रहा है। शशि कपूर का नाता भी जबलपुर से रहा। शशि कपूर की प्रोड्यूस की गई पहली फिल्म '३६ चौरंघी लेन शहर के एम्प्लायर सिनेम

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Shashi Kapoor news of jabalpur

Shashi Kapoor news of jabalpur

जबलपुर . बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शशि कपूर दुनिया को अलविदा कह गए। उनकी फिल्मों, डायलॉग ने जो छाप छोड़ी है, वह हमेशा उनके प्रशंसकों में जिंदा रहेगी। कपूर खानदान का जबलपुर से जुड़ा रहा है। एेसे में शशि कपूर का नाता भी जबलपुर से रहा। शशि कपूर की प्रोड्यूस की गई पहली फिल्म '३६ चौरंघी लेनÓ शहर के एम्प्लायर सिनेमा में प्रदर्शित की गई, जबकि एम्पायर सिनेमा में चुनिंदा अंगे्रजी फिल्में में प्रदर्शित होती थीं। ब्लॉगर पंकज स्वामी ने बताया कि प्रेमनाथ ने रिश्तेदारी को निभाते हुए विशेष रूप से उनकी फिल्म यहां प्रदर्शित करवाई थी। दरअसल प्रेमनाथ की बहन कृष्णा कपूर की शादी राज कपूर से हुई थी और शशि कपूर राज कपूर के भाई थे।


एक मुलाकात
विवेचना रंगमंडल के कलाकार मुम्बई विजिट के दौरान २००२ में शशि से मिले थे। उनसे उन्होंने थिएटर की बातें भी सीखी थीं। यह मौका मनीष तिवारी, सिल्की जैन, सौरभ और राजेश वर्मा को मिला।


वो हर नए प्ले को देखने आते थे
जबलपुर के रहने वाले सौरभ नय्यर पृथ्वी थिएटर (शशि कपूर के थिएटर) में अभिनय के गुर सीखते हैं। इस बहाने कई बार उन्हें शशि कपूर से भेंट का मौका मिला। सौरभ ने बताया कि शशि थिएटर में तैयार होने वाले हर नए प्ले को देखने आते थे। भले ही उनकी तबियत ही खराब क्यों न हो, वह व्हील चेयर में आते थे। जहां उन्हें कुछ कमी लगती थी, वह उसे समझाते थे।


कलाकार इतिहास छोड़कर जाता है
शशि कपूर फिल्म इंडस्ट्री के चहेते कलाकार रहे। उनके निधन का समाचार सुनकर बहुत दुख हुआ। उनका अभिनय लाजवाब होता था। मैंने कई चीजें उनसे सीखी। उनके साथ अभिनय का मौका तो नहीं मिला, लेकिन एफटीआईआई पुणे और कुछ मौकों पर मुलाकात हुई। ९० के दशक में एक मौके पर उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में बदलाव पर चिंता जाहिर की थी। वह मिलनसार थे। अपने समय के स्टार कलाकार होने पर भी इसका अहसास नहीं होने देते थे। उन्होंने जो काम किया, वह हमेशा जिंदा रहेगा। कलाकार हमेशा इतिहास छोड़कर जाता है।


- रघुवीर यादव, फिल्म कलाकार


मिलते ही खिल उठता था चेहरा
फिल्म जगत का चमकता सितारा रहे शशिजी के चेहरे पर भी वैसा ही नूर था। वे लोगों से हमेशा मुस्कुराकर मिलते थे। उनका यही अंदाज लोगों को आकर्षित कर लेता था। शशिजी से मुझे मिलने का मौका मिला, इसे मैं अपना सौभाग्य मानता हूं। उनका निधन फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक अपूर्णनीय क्षति है। उनके जाने से इंडस्ट्री में उदासी छा गई है। शशिजी का सहज और मिलनसार व्यक्तित्व लोगों के मन में सदा जीवित रहेगा।
- बीके तिवारी, फिल्म अभिनेता, मुम्बई